http://www.bbcchindi.com

शुक्रवार, 10 अक्तूबर, 2008 को 16:09 GMT तक के समाचार

कश्मीर का हल बातचीत से ही

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा तो नहीं बदली जा सकती है पर सीमाओं के लिए ज़रूरी पाबंदियों को कम किया जा सकता है. सीमाओं की अहमियत को कम किया जा सकता है.

लेकिन उन्होंने कहा कि इसके लिए ज़रूरी है कि पाकिस्तान के साथ एक दोस्ताना माहौल में बातचीत हो और उन सवालों के हल खोजने की कोशिश की जाए जो कश्मीर के मुद्दे पर उठाए जाते रहे हैं.

बगलिहार परियोजना का उदघाटन करने के बाद शुक्रवार की शाम प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजधानी श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ये बातें कहीं.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर के लोगों से जो वादे किए हैं उन्हें पूरा किया जाएगा और कश्मीर के लोगों और इस क्षेत्र की अलग पहचान को बनाए रखने की बात ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ेंगे.

प्रधानमंत्री ने पिछले चार वर्षों के दौरान केंद्र सरकार के राज्य के प्रति प्रयासों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में विकास के लिए रीकंस्ट्रक्शन प्लान तैयार किया गया है जिसके लिए 24 हज़ार करोड़ रूपए दिए गए हैं.

इस धन से राज्य में कई योजनाएं लागू होनी हैं जिसमें से 19 को पूरा किया जा चुका है. बगलिहार पनबिजली परियोजना इसी का एक हिस्सा है.

राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास की ज़रूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि सड़क, रेल और वायुमार्गों के सुचारु किए जाने के साथ ही पनबिजली पर ख़ास ध्यान दिया जा रहा है.

घोषणा

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि राज्य के विकास के लिए यहाँ एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और एक आईआईएम बनाने की योजना तैयार हो चुकी है. साथ ही जम्मू और श्रीनगर के मेडिकल कॉलेजों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों के स्तर का बनाने की भी घोषणा की गई.

पड़ोस के साथ संबंधों के बारे में उन्होंने कहा, "अगर हम शक, डर, दुश्मनी के माहौल को ख़त्म करते हुए खुले दिल से दोस्ताना रवैये के साथ आगे बढ़ें तो अपने अतीत को पीछे छोड़ सकते हैं."

प्रधानमंत्री ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के ज़रिए ही खोजा जाना चाहिए. जब उनसे यह पूछा गया कि कश्मीर में जो अलगाववादी गुट उनसे बातचीत कर रहे थे, वे भी अब भारत सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं तो उन्होंने कहा कि वो सभी गुटों और समूहों को बातचीत की खुली दावत देते हैं और सभी पक्षों से बातचीत के लिए तैयार हैं.