बुधवार, 08 अक्तूबर, 2008 को 14:47 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस (एपीएचसी) के एक धड़े ने कश्मीर विवाद का हल बातचीत के ज़रिए ढूँढ़ने पर एक बार फिर ज़ोर दिया है.
एपीएचसी के उदारवादी धड़े की कार्यकारी समिति ने बुधवार को मीर वाइज़ उमर फ़ारुक़ के नेतृत्व में एक बैठक का आयोजन किया था. इसमें कश्मीर में हाल में अलगाववादी आंदोलनों को मिले जन समर्थन पर चर्चा हुई.
बातचीत की प्रक्रिया में अपना विश्वास व्यक्त करते हुए कार्यकारी समिति के एक प्रवक्ता का कहना था, "विवाद का हल अंततः बातचीत से ही संभव है."
समिति का कहना था कि भारत और पाकिस्तान के साथ बातचीत को नकारना ठीक नहीं है.
ग़ौरतलब है कि मीर वाइज़ उमर फ़ारुक़ के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया हुर्रियत कॉन्फ़्रेस ने चार वर्ष पहले कट्टरपंथियों और चरमपंथियों के विरोध के बावजूद भारत सरकार के साथ बातचीत शुरु की थी.लेकिन तीन साल पहले बातचीत को रोक दिया गया था.
व्यवहारिक नीति
सर्वदलीय हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के प्रवक्ता का कहना था कि कश्मीरी नेताओं को व्यवहारिक नीति अपनानी चाहिए ताकि हाल के जन आंदोलनों से जो अवसर मिले हैं वह हाथ से निकल न जाएँ.
कॉन्फ़्रेस ने भारत से माँग की है कि वो तथ्यों को खारिज़ नहीं करे भले ही वे कटु हों और ऐसे क़दम उठाए जिससे राजनीतिक माहौल सौहार्दपूर्ण हो सके.
कॉन्फ़्रेस ने भारतीय प्रशासन से माँग की है कि वे कश्मीर में राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करे और गिरफ़्तारियों को रोके. साथ ही 'आर्मड फ़ोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट' जैसे क़ानूनों को ख़त्म करने की भी उसने माँग की है.
एक बार फिर कॉन्फ़्रेस ने भारत प्रशासित कश्मीर में होने वाले चुनाव को ख़ारिज़ किया और कहा, "जब तक कोई ठोस समाधान नहीं ढूँढ़ा जाता है कश्मीर में शांति ओझल ही रहेगी."