भारत के टाटा समूह ने अपनी बहुचर्चित नैनो कार के उत्पादन के लिए गुजरात सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.
इस समझौते के बाद अहमदाबाद में एक प्रेस कांफ्रेंस में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये समझौता टाटा और गुजरात की भागीदारी का नया अध्याय शुरु करेगा.
मुख्यमंत्री का कहना था कि टाटा के आने से गुजरात परिवहन के क्षेत्र में नई मिसाल क़ायम करेगा और राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी.
इसी प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा ने कहा कि ये उनके जीवन का बहुत अहम दिन है.
उनका कहना था, "हम पिछले कुछ दिनों में अत्यंत दुखद अनुभव से गुज़रे हैं बंगाल में. सरकार की मदद के बावजूद. हालांकि जितनी तेज़ी से हमें यहां जगह मिली उससे मैं कह सकता हूं कि गुजरात हमारा नया घर होगा".
रतन टाटा का कहना था कि उन्होंने नैनो को उन लोगों के लिए बनाया है जो कम पैसे में कार खरीदना चाहते हैं. उनका कहना था कि नैनो आने वाले समय में पूरी दुनिया में परिवहन के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है.
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने नैनो के लिए गुजरात को ही क्यों चुना तो रतन टाटा का कहना था, "हमें जिस प्रभावी तरीके से और जल्दी ज़मीन मिली वो एक बड़ा कारण था. फिर गुजरात की रेप्युटेशन बहुत अच्छी है उद्योग के क्षेत्र में. हमें यहां कोई दिक्कत नहीं हुई".
टाटा को अहमदाबाद से कुछ दूर सानंद नामक स्थान पर 1100 एकड़ ज़मीन दी गई है जिसे टाटा बाज़ार की दर पर खरीदेगा. इस इलाक़े में टाटा के अलावा सभी वेंडरों को भी जगह मिलेगी.
यह पूछे जाने पर कि क्या पहली नैनो गुजरात से ही निकलेगी तो टाटा का कहना था कि यह संभव नहीं है लेकिन उन्होंने साफ किया कि उनकी कोशिश है कि नैनो निर्धारित समय पर ही आ जाए.
नैनो दीवाली के आसपास आनी है और उम्मीद की जा रही है कि इस दौरान कंपनी कुछ कारें ज़रुर लांच करेगी.
गुजरात में संयंत्र बनने के बाद यहां से प्रतिवर्ष ढाई से तीन लाख नैनो कारें निकल सकेंगी.