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मंगलवार, 07 अक्तूबर, 2008 को 11:13 GMT तक के समाचार

बीनू जोशी
बीबीसी संवाददाता, जम्मू

'कश्मीर में भीषण भूकंप का ख़तरा'

विश्लेषकों का कहना है कि जम्मू कश्मीर में 'भीषण भूकंप' की आशंका को लेकर ख़तरे की घंटी बजनी शुरु हो गई है.

जम्मू विश्वविद्यालय में भूगर्भशास्त्र विभाग के प्रोफ़ेसर जी एम भट का कहना है, "मोटे तौर पर भीषण भूकंप हर 500 वर्ष के बाद आता है. रिकॉर्ड के मुताबिक कश्मीर गैप में पिछली बार बड़ा भूकंप वर्ष 1555 में आया था."

प्रोफ़ेसर जी एम भट ने भूकंप के क्षेत्र में काफ़ी अध्ययन किया है.

भीषण भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर आठ या उससे अधिक होती है.

हिमालय क्षेत्र को भूकंप के लिहाज़ से तीन संवेदनशील गैप या क्षेत्र- कश्मीर, मध्य और असम में बाँटा गया है.

कश्मीर गैप के तहत भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का हिस्सा आता है.

प्रोफ़ेसर भट के अनुसार भूकंप से संबंधित अध्ययन का जनक कहे जाने वाले कोलोराडो विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर रोज़र बिलहैम ने भी अपने अध्ययन में कश्मीर गैप में भीषण भूकंप की आशंका का ज़िक्र किया है.

प्रोफ़ेसर बिलहैम ने लिखा है कि इस क्षेत्र में पिछला भीषण भूकंप वर्ष 1555 में आया था.

उल्लेखनीय है कि उस बड़े भूकंप के 500 साल बाद यानी वर्ष 2005 में रिक्टर पैमाने पर 7.6 की तीव्रता वाला भूकंप पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आया.

जान-माल का नुकसान

उल्लेखनीय है कि मुज़फ़्फ़राबाद में केंद्रित 2005 के भूकंप में जान-माल का काफ़ी नुकसान हुआ था और एक लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी.

 इस पैटर्न के अध्ययन के बाद हम कह सकते हैं कि वर्ष 2055 में या इससे पहले इस क्षेत्र में भीषण भूकंप आने की आशंका है
 
प्रोफ़ेसर जीएम भट, जम्मू विश्वविद्यालय

भट का कहना है, "भूकंप के इस पैटर्न के अध्ययन के बाद हम कह सकते हैं कि वर्ष 2055 में या इससे पहले इस क्षेत्र में भीषण भूकंप आने की आशंका है."

उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में आए भूकंप में ज़मीन के अंदर मौजूद ऊर्जा का दसवाँ हिस्सा ही बाहर निकल पाया था, बाकी जो ऊर्जा बची रही वह वर्ष 2055 से पहले भूकंप के ज़रिए बाहर आ सकती है.

इस क्षेत्र में लगातार आने वाले छोटी तीव्रता के भूकंपों के बारे में भट कहते हैं कि यह अच्छा है और इससे ज़मीन के अंदर मौजूद ऊर्जा बाहर निकलती रहती है.