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रविवार, 05 अक्तूबर, 2008 को 03:31 GMT तक के समाचार

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

कश्मीर में कर्फ़्यू, स्थिति तनावपूर्ण

भारत प्रशासित राज्य जम्मू-कश्मीर की कश्मीर घाटी में प्रशासन ने रविवार से अनिश्चितकालीन कर्फ़्यू लागू कर दिया है.

ऐसा सोमवार को घाटी में प्रस्तावित रैली के मद्देनज़र किया गया है. सोमवार को घाटी में भारतीय प्रशासन से स्वायत्तता की माँग करते हुए एक बड़ी रैली का आहवान किया गया है.

इस रैली का आहवान राज्य के अलगाववादी गुटों ने किया है. अलगाववादियों ने लोगों से अपील की है कि सोमवार को राज्य की स्वायत्तता और स्वतंत्रता की माँग के समर्थन में लोग राजधानी श्रीनगर के लाल चौक की ओर बढ़ें.

इससे पहले अगस्त के महीने में घाटी में इसी माँग को लेकर चार बड़ी रैलियाँ हो चुकी हैं जिनमें लाखों की तादाद में लोग शामिल हुए थे.

ऐसे में प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय घटना और रैली को रोकने की तैयारी में लग गया है. इसी के मद्देनज़र रविवार को ही पूरी घाटी में अनिश्चतकालीन कर्फ्यू घोषित कर दिया गया है.

हालांकि छह अक्टूबर को प्रस्तावित इस रैली के लिए पहले 25 अगस्त की तारीख तय की गई थी पर प्रशासन ने इसे रोकने के लिए नौ दिनों तक घाटी में कर्फ्यू लगाए रखा जिसकी वजह से रैली आयोजित नहीं हो सकी.

कड़े इंतज़ाम

सोमवार की रैली के मद्देनज़र प्रशासन ने राजधानी श्रीनगर के लालचौक को पूरी तरह से सील कर दिया है. इसके अलावा घाटी के सभी प्रमुख शहरों, कस्बों में सड़कों को बंद कर दिया गया है.

इस रैली को रोकने के लिए पुलिस ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक को हिरासत में ले लिया है. यासीन मलिक इस रैली की आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं.

उधर पिछले कुछ दिनों से अपने घर में ही नज़रबंद घाटी के ही एक अन्य अलगाववादी नेता, सैय्यद अली शाह गीलानी को शारीरिक तकलीफ़ की शिकायत के बाद पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया है.

ग़ौरतलब है कि अमरनाथ भूमि आवंटन विवाद के दौरान जम्मू और कश्मीर के बीच शुरू हुआ विरोध घाटी में स्वायत्तता के सवाल से जुड़ गया.

पिछले कुछ वर्षों से यह माँग कश्मीर के अलगाववादी संगठन उठाते रहे हैं कि कश्मीर को भारत से अलग एक पृथक और स्वायत्त राज्य के रूप में मान्यता मिले.

पिछले कुछ सप्ताहों में घाटी में अहिंसक प्रदर्शनों के साथ इस माँग को और प्रभावी ढंग से उठाने की कोशिश की गई.

अगस्त महीने से अबतक हुए ऐसे प्रदर्शनों के दौरान पुलिस को कई बार बल प्रयोग भी करना पड़ा जिसमें तकरीबन 30 लोगों की जानें गईं और कई लोग घायल हुए.

भारत सरकार को कश्मीर में प्रदर्शनों से निपटने के तरीकों के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की ओर से कड़ी आलोचना का सामना भी करना पड़ा था.