रविवार, 05 अक्तूबर, 2008 को 14:34 GMT तक के समाचार
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने प्रधानमंत्री को भेजी एक रिपोर्ट में कर्नाटक और उड़ीसा में हिंदू राष्ट्रवादी संगठन बजरंग दल पर पाबंदी लगाने का सुझाव दिया है.
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ऐसे संगठनों पर पाबंदी का सुझाव दिया है जो सांप्रदायिक सौहार्द को ख़राब करने के लिए ज़िम्मेदार हैं.
अल्पसंख्यक आयोग ने उड़ीसा और कर्नाटक मे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के सिलसिलेवार हमलों पर भी चिंता जताई है.
समाचार ऐजेंसी पीटीआई के अनुसार आयोग का कहना है कि राज्य सरकारों को उन संगठनों की गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत है जो सांप्रदायिक सौहार्द को ख़राब करने में आगे रहते हैं.
आयोग का कहना है कि ऐसे संगठनों पर पाबंदी लगानी चाहिए क्योकि सांप्रदायिक सौहार्द हर हाल बरक़रार रहना चाहिए.
आयोग के चेयरमैन मोहम्मद शफ़ी कुरैशी ने बीबीसी से बातचीत में सिर्फ़ इतना बताया कि उन्होंने गत दिनों प्रधानमंत्री को एक रिपोर्ट सौपी है जिसमें बजरंग दल पर पाबंदी का सुझाव दिया है लेकिन रिपोर्ट की मुख्य बातें बताने से इनकार कर दिया.
रिपोर्ट सार्वजनिक होगी
उनका कहना था कि यदि प्रधानमंत्री कार्यालय ने अगले दो चार दिनों में रिपोर्ट के आधार पर कोई निर्देश जारी नहीं किए तो रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया जाएगा.
कुरैशी का कहना था कि उन्होंने 16 से 18 सितंबर हालात का जायज़ा लेने के लिए हिंसा ग्रस्त कर्नाटक के मंगलोर, बंगलोर और उडुपी का दौरा किया था. ग़ौरतलब है कि यहाँ ईसाईयों पर लगातार हमले हो रहें हैं.
पीटीआई के अनुसार रिपोर्ट में उड़पी के ज़िला अधिकारी और पुलिस अधिकारी ने आयोग को बाताया की अबतक 17 लोगों को ईसाईयों पर हमले के लिए गिरफ्तार किया गया है जिनमें सभी के सभी बजरंग दल के लोग हैं.
आयोग ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई की जब कर्नाटक बजरंग दल के अध्यक्ष महेंद्र कुमार ने बयान जारी करके दावा किया था कि उन्होंने राज्य में प्राथना घरों पर हमले किए हैं तो फिर उन्हें क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार बंगलौर के अधिकारी ने आयोग को बताया कि दंगों के सिलसिले में 83 लोगों को न्यायिक हिरासत में लिया गया है जिनमें 36 लोग बजरंगदल के हैं.
ग़ौरतलब है कि केन्द्र सरकार पहले ही उड़ीसा और कर्नाटक सरकारों को चेतावनी भरे निर्देश दे चुकी है कि वो तुरंत कानून व्यवस्था की स्थिति को काबू में लाए.