रविवार, 05 अक्तूबर, 2008 को 09:32 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंद प्रांत में तैनात उच्च ब्रिटिश कमांडर ने कहा है कि ब्रिटेन को अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के ख़िलाफ़ अपनी सेना की निर्णायक जीत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.
ब्रिगेडियर मार्क कार्लेटन-स्मिथ ने संडे टाइम्स को बताया कि इस मिशन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि अफ़ग़ान सेना स्वयं अपने देश को संभाल सके.
उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय सेनाएं अफ़ग़ानिस्तान से चली जाएंगी, तब भी ग्रामीण स्तरों पर नियमित रूप से चलने वाली विद्रोह की घटनाएं होती रह सकती हैं.
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सेनाओं से यह उम्मीद करना बेमानी होगा कि वे देश से हथियारबंद विद्रोहियों का सफ़ाया कर देंगी.
हिंसा न रहे विकल्प
ब्रिगेडियर स्मिथ 16वीं एयर एसॉल्ट ब्रिगेड के कमांडर हैं जिसने अभी अफ़ग़ानिस्तान में अपना दूसरा दौरा पूरा किया है.
उन्होंने कहा, "हम इस युद्ध को नहीं जीत पाएँगे. हम चाहते हैं कि विद्रोह की घटनाएं इस स्तर तक घट जाएं कि इन्हें अफ़ग़ान सेना संभाल सके." हालांकि ब्रिगेडियर ने कहा कि 2008 में उनकी सेना ने तालेबान को कमज़ोर किया है.
ब्रिगेडियर स्मिथ ने कहा कि अब हमारा लक्ष्य है कि बातचीत के माध्यम से कैसे समस्या का समाधान किया जाए ताकि हिंसा ही लोगों का एकमात्र विकल्प न रहे.
उन्होंने कहा, "अगर तालेबान राजनीतिक समझौते के लिए बातचीत को तैयार हों तो यह एक ऐसा तरीक़ा हो सकता है जिससे विद्रोह की घटनाएं समाप्त हो जाएं."
अफ़ग़ानिस्तान में 2001 में जब से अंतरराष्ट्रीय सेनाओं का ऑपरेशन शुरू हुआ है, ब्रितानी सेना के 120 जवान मारे गए हैं.