सोमवार, 29 सितंबर, 2008 को 20:02 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि क़बायली इलाक़े बाजौर में सेना और चरमपंथियों के बीच चले रहे संघर्ष के चलते 20 हज़ार पाकिस्तानी अफ़ग़ानिस्तान चले गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी मामलों की एजेंसी ने कहा है कि क़रीब चार हज़ार पाकिस्तानी परिवारों ने उत्तर पश्चिमी सीमा पार कर अफ़ग़ानिस्तान के कुनार प्रांत में शरण ली है.
हाल के हफ़्तों में तीन लाख लोगों ने पूर्वी भाग में पाकिस्तान के भीतर ही शरण ली है. इनमें से कई तो अस्थाई रुप से बनाए गए शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं.
बाजौर में सेना ने दो महीने पहले चरमपंथियों के ख़िलाफ़ बड़े संघर्ष की शुरुआत की है.
सेना का दावा है कि उन्होंने अब तक कोई दो हज़ार चरमपंथियों को मारा है.
सीमापार शरण
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी मामलों की समिति (यूएनएचसीआर) के उच्चायुक्त का मानना है कि केंद्र प्रशासित क़बायली इलाक़ों (फ़ाटा) से अफ़ग़ानिस्तान चले गए पाकिस्तानी नागरिक संघर्ष समाप्त होने के बाद वापस लौट आएँगे.
संघर्ष के चलते सीमा पार जाने वालों के आँकड़े जारी करते हुए यूएनएचसीआर ने अफ़ग़ानिस्तान में कहा कि पिछले दो ही हफ़्तों में कम से कम 600 परिवार विस्थापित हुए हैं.
यूएनएचसीआर के प्रवक्ता ने कहा है कि यदि सर्दियाँ शुरु होने के बाद तक विस्थापित लोग वापस नहीं लौट पाते हैं तो संस्था उनकी मदद करेगी.
उनका कहना था, "हालांकि विस्थापित लोगों ने रिश्तेदारों और मित्रों के यहाँ शरण ली है लेकिन 200 लोगों को अभी भी कोई छत नहीं है."
यूएनएचसीआर का कहना है कि जो लोग पाकिस्तान से विस्थापित हुए हैं उनमें 70 प्रतिशत परिवार पाकिस्तान के हैं लेकिन बाक़ी लोग अफ़ग़ान ही हैं जो पाकिस्तान में रह रहे थे.
इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान के लोग संघर्ष के कारण सीमापार करके पाकिस्तान जाते रहे हैं.
अधिकारियों का कहना है कि 80 और 90 के दशक में हिंसा की वजह से 40 लाख अफ़ग़ान नागरिकों ने पाकिस्तान की शरण ली थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनमें से आधे लोग वापस अपने घर लौट चुके हैं.
ख़तरनाक स्थिति
पाकिस्तानी सेना ने पिछले दो महीनों से उत्तर-पश्चिम प्रांत में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ मुहीम छेड़ रखी है.
संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने पहले अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे इस इलाक़े के चरमपंथियों से बातचीत करने की कोशिश की थी लेकिन लगता है कि वह विफल रही.
पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से चरमपंथियों की आत्मघाती हमलों की घटनाएँ बढ़ी हैं.
चरमपंथियों ने दो हफ़्ते पहले ही इस्लामाबाद में मैरियट होटल में एक बड़ा आत्मघाती हमला किया था. जिसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी.
पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े चरमपंथियों के गढ़ रहे हैं और वहाँ से वे पाकिस्तान और सीमापार अफ़ग़ानिस्तान में हमलों की योजना बनाते और उसे अंजाम देते रहे हैं.
माना जाता है कि अफ़ग़ानिस्तान में चल रही कार्रवाई के चलते तालेबान और अल-क़ायदा के चरमपंथियों ने इन क़बायली इलाक़ों की शरण ली है.
इन चरमपंथियों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों के चलते ही हाल के दिनों में अमरीका ने कई बार अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पार कर इन इलाक़ों में कार्रवाई की है.
हालांकि अमरीकी कार्रवाई का पाकिस्तान सरकार ने नाराज़गी के साथ विरोध किया है और कई बार पाकिस्तानी सेना ने अमरीकी फ़ौजों पर भी गोलीबारी की है.