शुक्रवार, 26 सितंबर, 2008 को 09:41 GMT तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा कांड पर आई नानावती रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.
एक ग़ैर सरकारी संगठन सिटिज़न फ़ॉर जस्टिस एंड पीस ने एक याचिका दायर करके नानावती रिपोर्ट पर रोक लगाने की मांग की थी.
मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अगुआई वाली खंडपीठ ने गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस मामले की सुनवाई के लिए 13 अक्तूबर की तारीख़ तय की है.
लेकिन खंडपीठ ने नानावती आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर रोक लगाने से मना कर दिया.
गोधरा के निकट साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग और उसके बाद राज्य में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की जाँच कर रहे नानावती आयोग की रिपोर्ट का पहला हिस्सा गुरुवार को गुजरात विधानसभा में पेश किया गया था.
नानावती आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग दुर्घटना नहीं बल्कि पूर्व नियोजित साज़िश थी.
याचिका
इसके पहले केंद्र की यूपीए सरकार ने साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग की जाँच के लिए यूसी बैनर्जी समिति का गठन किया था और समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आग साज़िश नहीं थी बल्कि दुर्घटना थी.
बाद में गुजरात हाई कोर्ट ने बैनर्जी समिति की रिपोर्ट पर रोक लगा दी थी.
ग़ैर सरकारी संगठन सिटिज़न फ़ॉर जस्टिस एंड पीस ने अपनी याचिका में बैनर्जी समिति की रिपोर्ट पर रोक लगाने का हवाला देते हुए कहा था कि इसी आधार पर नानावती रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने पर भी रोक लगा देनी चाहिए.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से मना कर दिया. नानावती आयोग ने साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग को साज़िश तो बताया ही साथ ही ये भी कहा कि नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार या किसी भी पुलिस अधिकारी ने गोधरा कांड में किसी तरह की भूमिका नहीं निभाई है.
27 फरवरी 2002 को गोधरा के निकट साबरमती एक्सप्रेस में आग लग गई थी, जिसमें 59 लोग मारे गए थे. लेकिन इसके बाद गुजरात सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गया था जिसमें एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे. जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे.