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शुक्रवार, 26 सितंबर, 2008 को 20:12 GMT तक के समाचार

पाक सेना ने 'एक हज़ार चरमपंथी मारे'

पाकिस्तान सेना का कहना है कि पिछले एक महीने में क़बायली ज़िले बाजौर में हुए भीषण संघर्ष में एक हज़ार इस्लामिक चरमपंथियों को मारा है.

सेना का कहना है कि वह अगले तीन महीने में तालेबान और अल-क़ायदा के कब्ज़े से यह क्षेत्र वापस ले लेगी.

सेना का कहना है कि मारे गए चरमपंथियों में पाँच बड़े नेता शामिल हैं.

बाजौर पाकिस्तान के सबसे गड़बड़ी वाले क़बायली इलाक़ों में से है.

सेना पत्रकारों को इस इलाक़े के दौरे पर ले गई थी और वहाँ मेजर जनरल तारिक़ ख़ान ने कहा, "इस इलाक़े पर यदि नियंत्रण स्थापित हो जाता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा."

उनका कहना था कि यदि बाजौर में चरमपंथियों को परास्त किया जा सके तो चरमपंथियों की 65 प्रतिशत समस्या ख़त्म हो जाएगी.

उन्होंने कहा, "यदि वे यहाँ हार गए तो वे लगभग सब कुछ खो देंगे."

मेजर जनरल ख़ान का कहना था, "यदि हम यहाँ कोई कार्रवाई नहीं करते हैं तो यहाँ एक ऐसी संस्था स्थापित हो जाएगी जो चारों दिशाओं में आतंक फैलाती रहेगी."

अल-क़ायदा का इलाक़ा

उनका कहना था कि बाजौर में हुई इस कार्रवाई में 27 सैनिकों की मौत हुई है और 111 घायल हुए हैं.

यह कार्रवाई पिछले महीने उसी समय शुरु हुई थी जब पाकिस्तान सेना पर अमरीका की ओर से चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए दबाव बढ़ रहा था.

संवाददाताओं का कहना है कि सेना के इस दावे की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र सूचना उपलब्ध नहीं है.

पाकिस्तान में बीबीसी के संवाददाता एम इलियास ख़ान का कहना है कि सेना चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है और इसके चलते हज़ारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बाजौर में सेना को गुरिल्ला छापामारों के हमलों और आत्मघाती हमलों का सामना नहीं करना पड़ा है लेकिन इस इलाक़े के बड़े हिस्से पर चरमपंथियों का नियंत्रण है और वहाँ पारंपरिक संघर्ष चल रहा है.

मेजर जनरल ख़ान का कहना है कि मारे गए चरमपंथी कमांडर मिस्र, उज़बेकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के हैं. एक कमांडर अरब बताया गया है जबकि पाँचवा पाकिस्तान से ही है.

बाजौर को अल-क़ायदा चरमपंथियों का गढ़ माना जाता है और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे इस इलाक़े में 2006 से कई बार अमरीकी सेना का हमला हो चुका है.

इस बीच पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर कुनार प्रांत में पाकिस्तानी सेना और चरमपंथियों के बीच वर्ष 2001 के बाद से अब तक का सबसे भीषण संघर्ष चल रहा है.