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शुक्रवार, 26 सितंबर, 2008 को 16:22 GMT तक के समाचार

जामिया के समर्थन में अर्जुन सिंह

केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह ने दिल्ली के जामिया नगर इलाक़े में हुई मुठभेड़ के बाद गिरफ़्तार छात्रों की क़ानूनी मदद के जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फ़ैसले का समर्थन किया है.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फ़ैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि ये फ़ैसला देश हित में है.

लेकिन विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इस फ़ैसले की आलोचना की है और कुलपति मुशीरुल हसन को हटाने की मांग की है.

दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में अर्जुन सिंह ने कहा, "क़ानूनी मदद उपलब्ध कराने में कुछ भी ग़लत नहीं है. इस मामले में मुझे पूरे विवरण पता हैं. मुझे कुलपति मुशीरुल हसन ने जो भी जानकारी दी है, मैं इस मामले को उसी परिप्रेक्ष्य में देखता हूँ. जामिया का फ़ैसला राष्ट्रहित में है."

इससे पहले एक और केंद्रीय मंत्री और लोकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान ने भी जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फ़ैसले का समर्थन किया था.

उन्होंने मुशीरुल हसन को राष्ट्रवादी सोच वाला व्यक्ति बताया था. रामविलास पासवान ने कहा था, "कुलपति मुशीरुल हसन ने सही फ़ैसला किया है. मेरी पार्टी उनका समर्थन करती है. अगर हम ये नहीं कह सकते कि बच्चे निर्दोष हैं तो कोर्ट का फ़ैसला आने तक उन्हें गुनहगार भी नहीं कह सकते."

आलोचना

लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इस फ़ैसले की आलोचना की है और कहा है कि पार्टी मंत्री के बयान से चिंतित है. पार्टी महासचिव अरुण जेटली ने कहा, "सरकार या कोई भी सरकारी तंत्र जब इस तरह की सहायता देता है तो उससे यही संकेत मिलता है कि आतंक की कार्रवाई को सामाजिक मान्यता दी जा रही है."

अरुण जेटली ने कहा कि जामिया के कुलपति ने विश्वविद्यालय और अपने विश्वास को लेकर प्रतिबद्धता जताई है लेकिन राष्ट्र और सरकार पर प्रतिबद्धता को भी जगह मिलनी चाहिए.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति मुशीरुल हसन ने गिरफ़्तार किए गए जामिया के दो छात्रों को क़ानूनी मदद देने की घोषणा थी.

बीबीसी से बातचीत में मुशीरुल हसन ने बताया था, "हमने कहा है जामिया के जिन छात्रों पर आरोप लगा है कि वे आतंकवादी हैं, उन्हें क़ानूनी मदद दी जाएगी. हम तो सिर्फ़ ये सोचते हैं कि जब तक उन पर अपराध साबित नहीं होता, वे निर्दोष हैं. अगर वे दोषी हैं तो उन्हें सज़ा ज़रूर मिलेगी."

इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से पिछले दिनों जामिया नगर में हुई पुलिस मुठभेड़ के बारे में जवाब मांगा है.