बुधवार, 24 सितंबर, 2008 को 08:34 GMT तक के समाचार
एक प्रभावी आतंकवाद-निरोधक क़ानून की आवश्यकता को स्वीकारते हुए कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी ने कहा है कि देश को एक आतंकवाद निरोधक क़ानून की ज़रूरत है.
बुधवार को पंजाब के जालंधर शहर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में आतंकवाद को रोकने के लिए एक क़ानून बनना चाहिए.
पर राहुल गांधी ने बहुत स्पष्ट शब्दों में यह भी दोहराया कि इसके लिए पोटा जैसे क़ानून को विकल्प के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में बढ़ी चरमपंथी गतिविधियों के मद्देनज़र विपक्ष लगातार केंद्र सरकार से मांग करता रहा है कि ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए पोटा क़ानून लागू किया जाए.
इस तर्क से उलट केंद्र सरकार ने पोटा को लेकर अपना मत नकारात्मक ही रखा है. केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए गठबंधन के घटक दल पोटा जैसे क़ानून के पक्ष में नहीं हैं.
क़ानून पर राजनीति
पर अहमदाबाद, जयपुर और दिल्ली में पिछले दिनों हुए चरमपंथी हमलों के बाद विपक्ष ने इस क़ानून की आवश्यकता का ज़ोर-शोर से प्रचार किया है.
इसी सवाल के जवाब में बुधवार को राहुल गांधी ने कहा, "मैं मानता हूँ कि देश को एक आतंकवाद निरोधक क़ानून चाहिए पर पोटा इसका विकल्प नहीं हो सकता है."
उन्होंने कहा, "देश में जिस समय पोटा क़ानून लागू था, उन्हीं दिनों देश की संसद आतंकवादी हमले का निशाना बनी. और भी चरमपंथी हमले हुए. पोटा क़ानून इन्हें रोक पाने में नाकाम रहा."
राजनीतिक दलों का एक बड़ा हिस्सा पोटा क़ानून की आलोचना करता रहा है. उनका तर्क है कि इस क़ानून का इस्तेमाल सत्ता पर काबिज लोग अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के लिए ज़्यादा करेंगे. चरमपंथ जैसे सवाल का समाधान इससे नहीं खोजा जा सकता है.