गुरुवार, 18 सितंबर, 2008 को 13:37 GMT तक के समाचार
गोधरा कांड और उसके बाद हुए गुजरात दंगों की जाँच कर रहे दो सदस्यीय जस्टिस जीटी नानावती आयोग ने अपनी जाँच रिपोर्ट का पहला हिस्सा गुरुवार को मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया.
नानावती आयोग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय में सौंपी. इस अवसर पर राज्य के गृह राज्य मंत्री अमित शाह भी अपस्थित थे.
आयोग ने अपनी जाँच रिपोर्ट में क्या कहा है. इसका अभी पता नहीं चल पाया है. माना जा रहा है कि आयोग अपनी पूरी रिपोर्ट तय समय सीमा में ही सौंपेगा.
पहले इस आयोग को गोधरा कांड की ही ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन बाद में गुजरात में हुए दंगों को भी जाँच के दायरे में शामिल कर लिया गया था.
गोधरा काँड
साबरमती एक्सप्रेस की एस-छह बोगी को 27 फ़रवरी 2002 को गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर कथित रूप से कुछ लोगों ने जला दिया गया था.
बोगी में लगी आग से 59 लोगों की जलकर मौत हो गई थी. इसके बाद गुजरात में दंगे भड़क उठे थे. जिनमें दो हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे. मारे गए ज़्यादातर लोग मुसलमान थे.
गुजरात सरकार ने गोधरा कांड की जाँच के लिए जस्टिस केजी शाह आयोग का गठन किया था.
बाद में जस्टिस जीटी नानावती को इस आयोग का अध्यक्ष बनाया गया और जाँच का दायरा बढ़ाकर गोधरा कांड के बाद हुए गुजरात दंगों को भी इसमें शामिल कर दिया गया.
जस्टिस केजी शाह की मौत के बाद इस साल सात अप्रैल को जस्टिस अक्षय मेहता को इस जाँच आयोग सदस्य बनाया गया था.
नानावती आयोग ने पिछले छह साल में करीब एक हज़ार गवाहों से पूछताछ की है.
तीसरी रिपोर्ट
वर्ष 2004 में केंद्र में यूपीए सरकार बनने के बाद रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश यूसी बैनर्जी को गोधरा रेल कांड की जाँच का काम सौंपा था.
वर्ष 2006 में अपनी रिपोर्ट में न्यायमूर्ति बैनर्जी ने कहा था कि गोधरा में रेल के डिब्बे में लगी आग हादसा थी न कि कोई षडयंत्र.
इससे पहले केंद्र की यूपीए सरकार की एक और समिति ने इससे इनकार किया था कि गोधरा में ट्रेन में आग किसी षडयंत्र के तहत लगाई गई थी.
न्यायमूर्ति एससी जैन के नेतृत्व वाली इस तीन सदस्यीय समिति के पास गुजरात में गोधरा से जुड़े पोटा के मामलों की जाँच करने की ज़िम्मेदारी थी.
नानावती आयोग ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा है यह अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है.
वैसे आयोग को अभी अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी है.