मंगलवार, 16 सितंबर, 2008 को 03:50 GMT तक के समाचार
उड़ीसा के कंधमाल ज़िले में एक पुलिस थाने पर सोमवार को देर रात भीड़ ने हमला कर दिया है. इसमें एक पुलिसकर्मी की मौत भी हुई है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भीड़ ने थाने पर गोलियाँ भी चलाईं और फिर आग लगा दी.
कुछ पुलिसकर्मी लापता बताए गए हैं जिनकी तलाश की जा रही है. पुलिस को आशंका है कि उन्हें भीड़ अगुवा करके अपने साथ ले गई होगी.
अभी यह पता नहीं चल सका है कि भीड़ में कौन लोग थे और उनका मक़सद क्या था.
पिछले महीने उड़ीसा में विश्व हिंदू परिषद के एक नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार समर्थकों की हत्या के बाद भड़की गई थी.
इसके बाद ईसाई मिशनरियों और ठिकानों को निशाना बनाया गया था.
बहुत से चर्च और सैकड़ों लोगों के घर जला दिए गए थे.
हिंदुओं और ईसाइयों के बीच भड़की हिंसा में 18 लोग मारे गए थे और इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया हुई थी.
हमला
स्थानीय पत्रकार संदीप साहू का कहना है कि घटना सोमवार रात क़रीब साढ़ ग्यारह बजे की है.
कंधमाल ज़िले के गोछापड़ा थाने पर कोई डेढ़-दो सौ लोगों की एक भीड़ ने हमला कर दिया.
उड़ीसा के पुलिस महानिदेशक गोपाल नंदा का कहना है कि भीड़ ने थाने पर गोलियाँ दागीं और फिर थाने में आग लगा दी. इसमें एक पुलिसकर्मी की मौत भी हो गई.
डीआईजी दक्षिण रेंज आरपी कोचे का कहना है कि थाने में तैनात कुछ पुलिसकर्मी लापता हैं और हो सकता है कि भीड़ उन्हें अगुवा करके अपने साथ ले गई हो.
बताया गया है कि वहाँ बहुत तनाव है. ज़िलाधीश और पुलिस अक्षीक्षक को वहाँ भेजा गया है लेकिन उनका वहाँ पहूँचना संभव नहीं हो पा रहा है क्योंकि रास्ते पर पेड़ काटकर गिरा दिए गए हैं जिससे रास्ता बंद हो गया है.
अभी पुलिस यह नहीं बता पा रही है कि इस भीड़ में कौन लोग होंगे लेकिन माना जा रहा है कि इसका संबंध शनिवार की पुलिस कार्रवाई से हो सकता है.
शनिवार को कंधमाल ज़िसे के ही कुर्तभगढ़ में पुलिस ने हिंदू कार्यकर्ताओं की एक उग्र भीड़ के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी जिसमें चार आदिवासियों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे.
इस कार्रवाई से आदिवासी बहुत नाराज़ है और अब लोगों का गुस्सा किसी संप्रदाय की बजाय पुलिस पर ज़्यादा है.