मंगलवार, 16 सितंबर, 2008 को 19:16 GMT तक के समाचार
केंद्र सरकार के रवैये के विपरीत सरकार के एक आयोग ने आतंकवाद से निपटने के लिए नया क़ानून बनाने की सिफ़ारिश की है और कहा है कि मौजूदा क़ानून इस समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.
सरकार द्वारा गठित दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग ( एआरसी) की आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर दी गई आठवीं रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवाद का सामना करने के लिए एक नए और प्रभावी क़ानूनी ढांचे की ज़रुरत है.
दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस में 185 पन्नों की रिपोर्ट जारी करते हुए आयोग के चेयरमैन वीरप्पा मोयली का मानना था कि मौजूदा क़ानून आतंकवाद की समस्या से निपटने कि एल पर्याप्त नहीं हैं और नए क़ानून में इसके दुरुपयोग को रोकने की भी व्यवस्था होगी.
हालांकि केंद्र सरकार अब तक कहती रही है कि आतंकवाद से निपटने के लिए किसी नए क़ानून की ज़रुरत नहीं है और मौजूदा क़ानून ही पर्याप्त हैं.
मोयली का कहना था कि नया क़ानून अलग से नहीं बनाया जाएगा लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून 1980 ( रासुका) में ही आतंकवाद से लड़ाई के लिए एक विशेष अध्याय जोड़ दिया जाएगा.
नई व्यवस्था के तहत रासुका में पकड़े गए लोगों को ज़मानत नहीं मिल सकेगी.
मोयली ने विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के इन आरोपों को ख़ारिज़ कर दिया कि केंद्र सरकार आतंकवाद के मुद्दे पर नरम रही है.
उनका कहना था विपक्षी दल की पोटा लाने की मांग नाजायज़ है क्योंकि इसका दुरुपयोग हुआ था.
आयोग की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए सीबीआई में ही एक शाखा बना दी जाए और साथ ही ऐसे मामलों के लिए स्पेशल फॉस्ट ट्रैक कोर्ट भी बनाए जाएं.
उल्लेखनीय है कि सरकार कहती रही है कि आतंकवाद से निपटने के लिए किसी नए क़ानून की ज़रुरत नही है.