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शनिवार, 13 सितंबर, 2008 को 09:20 GMT तक के समाचार

नेपाल ने 'तिब्बतियों' पर कड़ा रुख़ अपनाया

नेपाल ने ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से देश में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों को वहाँ से बाहर निकालने की घोषणा की है.

नेपाल के गृह मंत्री के प्रवक्ता मोदराज डोटेल के अनुसार हाल ही में पुलिस ने 106 तिब्बतियों को हिरासत में लेकर ये जाँच करने की कोशिश की कि उनके पास वैध शरणार्थी प्रमाण पत्र हैं या नहीं हैं.

ग़ौरतलब है कि तिब्बतियों ने नेपाल में महीनों तक प्रदर्शन किए थे और उनका आरोप था कि तिब्बत में चीन धर्म के आधार पर लोगों को प्रताड़ित कर रहा है.

बीस हज़ार से ज़्यादा तिब्बती शरणार्थी नेपाल में रह रहे हैं. नेपाल की नई सरकार चीन की विश्वस्त सहयोगी है. यही कारण है कि नेपाल के नवनियुक्त माओवादी प्रधानमंत्री प्रचंड ने पद संभालने के कुछ ही देर बाद चीन का दौरा किया था.

सख़्त रवैया

नेपाल सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि काग़ज़ों की जँच पड़ताल नेपाल में संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों के मामलों से जुड़ी संस्था यूएनएचसीआर के अधिकारियों की मदद से की जा रही है.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता डोटेल का कहना है, "हम लोग तिब्बतियों की शुरुआती जाँच पड़ताल कर रहे हैं. जिन तिब्बतियों के पास ज़रुरी काग़ज़ात नहीं होंगे उनका प्रत्यर्पण किया जाएगा और वहाँ भेज दिया जाएगा जहाँ से वे आए हैं."

युएनएचसीआर के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि यदि हिरासत में लिए गए तिब्बतियों के पास वैध शरणार्थी प्रमाण पत्र नहीं होंगे तो वे उनकी मदद करेंगे कि वे किसी तीसरे देश में जा पाएँ.

काठमांडु में बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेविलैंड हेलेंड का कहना है कि नई कार्रवाई का मतलब है कि सरकार अपने देश के क़ानून का पूरी तरह से पालन कर रही है क्योंकि हाल के महीनों में इन क़ानूनों का सख़्ती से पालन नहीं हुआ है.

लेकिन डोटेल ने बाबासी से बातचीत करते हुए माना कि नेपाल में नई माओवादी सरकार के आने के बाद सरकार की नीति सख़्त हो रही है. प्रवक्ता ने आरोप लगाया के कुछ शरणार्थी आम नेपाली नागरिकों के लिए मुश्किलें पैदा कर रहे हैं.

हाल के महीनों में हज़ारों तिब्बतियों को नेपाल में चीन के ख़िलाफ प्रदर्शन करने पर हिरासत में लिया गया था. बीबीसी संवाददाता के अनुसार पहले उन्हें उसी दिन रिहा कर दिया जाता था.

वर्ष 1990 तक नेपाल में आने वाले तिब्बती शरणार्थी को देश में रहने की इजाज़त थी लेकिन उसके बाद चीन के दबाव के कारण नेपाल सरकार नए आने वाले शरणार्थियों को आसानी से देश में नहीं रहने दे रही. उन्हें युएनएचसीआर के संरक्षण में भेज दिया जाता है और वह उन्हें भारत जाने में मदद करता है.