शनिवार, 13 सितंबर, 2008 को 03:53 GMT तक के समाचार
बिहार के बाढ़ पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार और अन्य ज़रियों से अबतक मिली राहत राशि और सामग्री से फिलहाल लोगों को पूरी तरह से राहत मिलती नज़र नहीं आ रही है.
राज्य सरकार का कहना है कि इसके लिए उसे अतिरिक्त राहत राशि की ज़रूरत है और राज्य के मुख्यमंत्री ने इसीलिए केंद्र से एक अतिरिक्त आर्थिक पैकेज की माँग की है.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए नौ हज़ार करोड़ के अतिरिक्त आर्थिक पैकेज की माँग की है.
बीबीसी के बिहार संवाददाता मणिकांत ठाकुर ने बताया कि जो विशेष पैकेज राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री के सामने रखा है उसमें 8,922 करोड़ रूपए की मदद मांगी गई है.
बिहार में कोसी नदी में आई बाढ़ के कारण लाखों की तादाद में लोग बेघर हो गए हैं. सैकड़ों लोग और मवेशी बाढ़ की चपेट में आकर मारे गए हैं और लाखों लोग अभी भी अपने घर नहीं लौट सके हैं.
राज्य सरकार को इस आपदा से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक हज़ार करोड़ रुपए की आर्थिक मदद और सवा लाख टन अनाज पहले ही दिया जा चुका है.
पहले निगरानी, फिर मदद
पर केंद्र सरकार ने इस बाबत अभी तक राज्य सरकार को कोई आश्वासन नहीं दिया है.
दरअसल, केंद्र का कहना है कि राज्य में बाढ़ से पीड़ित लोगों की तादाद, वापस लौट रहे लोगों, सभी प्रभावितों को बाहर निकाल लेने के दावे और अभी तक फंसे लोगों की जो तादाद राज्य सरकार द्वारा बताई जा रही है उसमें परस्पर विरोधाभाष है.
अब इसके लिए एक केंद्रीय निगरानी समिति को राज्य में ज़मीनी स्थिति का जायज़ा लेने के लिए भेजा जा रहा है.
माना जा रहा है कि इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही राज्य सरकार के प्रस्तावित आर्थिक पैकेज पर विचार किया जा सकता है.
केंद्र सरकार में बिहार के जो सांसद मंत्रिमंडल में शामिल हैं उन्होंने भी राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे राहत कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत की है.
हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री का कहना है कि बाढ़ से नुकसान इतना ज़्यादा हुआ है कि पुनर्निर्माण आवश्यक हो गया है.
ताज़ा आकलन के मुताबिक क़रीब तीन लाख मकानों के निर्माण की ज़रूरत राज्य सरकार की ओर से सुझाई गई है.