शुक्रवार, 12 सितंबर, 2008 को 17:32 GMT तक के समाचार
पश्चिम बंगाल में विपक्ष की नेता ममता बैनर्जी ने सिंगुर में टाटा के संयंत्र की वजह से विस्थापित किसानों के पुनर्वास की सरकार की नई योजना को ठुकरा दिया है.
तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बैनर्जी की प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से हुई मुलाक़ात के बाद आई है.
दोनों नेताओं की बैठक हड़बड़ी में बुलाई गई थी.
इससे पहले सिंगुर के किसानों के पुनर्वास का मसला सुलझाने के लिए सरकार और विपक्ष की समितियों की दो दिनों तक बैठक हो चुकी थी.
सिंगुर में टाटा कंपनी दुनिया की सबसे सस्ती कार बनाने जा रहे हैं लेकिन इस परियोजना के लिए किसानों की ज़मीन लिए जाने से नाराज़ लेकर विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि जिन किसानों ने मुआवज़ा नहीं लिया है उन्हें ज़मीन लौटा देनी चाहिए.
टाटा ने इस विवाद के चलते उत्पादन का काम रोक दिया है और परियोजना को प्रदेश से बाहर स्थानांतरित करने की चेतावनी दी है.
योजना नामंज़ूर
पिछले रविवार को राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी ने मध्यस्थता करते हुए सरकार और विपक्ष के बीच सहमति का एक फ़ार्मूला निकाला था.
लेकिन टाटा ने तब तक काम शुरु न करने की बात कही है जब तक पूरा मामला पूरी तरह से सुलझ नहीं जाता.
शुक्रवार को मुख्यमंत्री भट्टाचार्य से मिलने के बाद ममता बैनर्जी ने कहा, "सरकार ने किसानों के पुनर्वास का एक प्रस्ताव रखा जो हमें मंज़ूर नहीं है. मैं चाहती हूँ कि सरकार उस समझौते का सम्मान करे जिस पर पिछले रविवार राज्यपाल की मौजूदगी पर हस्ताक्षर किए गए थे."
उन्होंने कहा, "जब तक सरकार उस समझौते को पूरी तरह लागू नहीं करती मैं और कोई प्रस्ताव स्वीकार ही नहीं कर सकती."
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को प्रस्ताव रखा है कि सरकार नैनो परियोजना वाले क्षेत्र में किसानों को 70 एकड़ ज़मीन लौटा सकती है और शेष किसानों को सिंगुर के आसपास ज़मीन दे दी जाएगी.
राज्य के उद्योग मंत्री सव्यसाची सेन का कहना है कि सरकार के पास किसानों को लौटाने के लिए इतनी ही ज़मीन है.
लेकिन ममता बैनर्जी का कहना है कि किसानों को परियोजना क्षेत्र में ही तीन सौ एकड़ ज़मीन लौटानी चाहिए.
मुख्यमंत्री का कहना है कि उन्होंने सिद्धांत रुप में ममता बैनर्जी का यह प्रस्ताव मान लिया है कि जिन किसानों की ज़मीन ली गई है उन्हें आजीविका चलाने के लिए ज़मीन दी जानी चाहिए.
इन किसानों ने ज़मीन के बदले पैसा लेने से इनकार कर दिया था.
टाटा की नैनो परियोजना के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने 997 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण किया था.
टाटा का कहना है कि 645 एकड़ तो कार परियोजना के लिए चाहिए और 290 एकड़ सहायक उद्योगों के लिए ज़रूरी है.
कंपनी का तर्क है कि कार की क़ीमत कम रखने के लिए ज़रूरी है कि यह एकीकृत परियोजना हो और सहायक उद्योग भी मुख्य उद्योग के पास ही लगें.