शुक्रवार, 12 सितंबर, 2008 को 20:51 GMT तक के समाचार
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान ने काला बाज़ार के लिए परमाणु हथियार और दूसरी संवेदनशील सूचनाओं की इलेक्ट्रॉनिक सामग्री तैयार कर रखी थी.
अब्दुल क़दीर ख़ान के इस नेटवर्क ने लीबिया, ईरान और उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक मुहैया करवाई थीं.
आईएईए की इस रिपोर्ट की एक प्रति बीबीसी के पास है और इसमें कहा गया है कि अब्दुल क़दीर ख़ान नेटवर्क ने परमाणु हथियार की सूचनाओं की भी सीडी बना रखी थी और इसे कालाबाज़ार में उपलब्ध करवाया जा रहा था.
हालांकि इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद सादिक़ ने कहा है कि इस रिपोर्ट में कोई नई बात नहीं है.
आईएईए को ये सूचनाएँ 2003 में लीबिया में की गई जाँच के दौरान मिली थीं. हालांकि आईएईए का कहना है कि लीबिया ने 2004 के बाद से परमाणु हथियार बनाने का कोई प्रयास नहीं किया है.
उल्लेखनीय है कि अब्दुल क़दीर ख़ान के चार साल पहले स्वीकार किया था कि उन्होंने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु सूचनाएँ दी थीं.
इसके बाद से वे नज़रबंद रहे हैं.
इलेक्ट्रॉनिक सामग्री
आईएईए का कहना है कि परमाणु हथियार से लेकर संवेदनशील परमाणु सूचनाओं तक सब कुछ सीडी, डीवीडी जैसी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के रुप में उपलब्ध थीं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे इस सामग्री को कहीं भी पहुँचाना आसान होता था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अब्दुल क़दीर ख़ान का नेटवर्क दुनिया के बीस देशों में सक्रिय था.
इन देशों में जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड, तुर्की, इटली, स्पेन और दक्षिण कोरिया आदि शामिल हैं.
आईएईए का कहना है कि इस नेटवर्क में शामिल देशों को परमाणु तकनीक से जुड़ी हर जानकारी आसानी से उपलब्ध थी.
जैसा कि स्वाभाविक था इस रिपोर्ट में लीबिया को लेकर परमाणु प्रसार की चिंता नहीं जताई गई है और लेकिन इसमें ईरान और उत्तर कोरिया का होना अहम है.
बीबीसी के संवाददाता बेटनी बेल का कहना है कि इन सूचनाओं का उपयोग ईरान और उत्तर कोरिया की जाँच में किया जा सकता है.