बुधवार, 10 सितंबर, 2008 को 05:04 GMT तक के समाचार
मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
बिहार सरकार ने कोसी नदी के पूर्वी तटबंध में 18 अगस्त को हुई टूट या कटाव के कारणों की न्यायिक जाँच का फ़ैसला किया है.
राज्य मंत्रिमंडल की मंगलवार रात हुई बैठक में ये फ़ैसला किया गया.
ये जाँच हाईकोर्ट के किसी अवकाश प्राप्त न्यायाधीश से कराई जाएगी और इसकी रिपोर्ट छह महीने के भीतर माँगी जाएगी.
जाँच के जो बिंदु तय किए गए हैं उनमें पहला है कि क्या सरकारी अधिकारियों अथवा अभियंताओं की लापरवाही के कारण ये बांध टूटा.
जाँच के विषय में ये भी शामिल है कि वर्ष 1990 से 2005 के बीच तटबंध की मजबूती के लिए तत्कालीन सरकार के स्तर पर क्या क़दम उठाए गए.
उल्लेखनीय है कि इस दौरान राबड़ी देवी की सरकार थी.
जाँच का एक बिंदु ये भी तय किया गया है कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में राज्य सरकार की कितनी सिफ़ारिशों पर अमल किया.
इस न्यायिक जाँच का राजनीतिक पहलू ये है कि नीतिश सरकार के समय इस संबंध में कथित लापरवाही की जाँच हो, साथ ही केंद्र सरकार और पिछली राज्य सरकार को भी लपेट लिया जाए.
ग़ौरतलब है कि सरकार के अनुसार कोसी की वजह से आई बाढ़ से लगभग 30 लोगों की मौत हुई है जबकि ग़ैरसरकारी संस्थानों का अनुमान है कि मरनेवालों की संख्या सैकड़ों में है.
इस बाढ़ से लगभग 25 लाख लोग विस्थापित हुए हैं.
सरकार का कहना है कि उसने बाढ़ से घिरे नौ लाख लोगों को सुरक्षित निकाला है और तीन लाख से अधिक लोगों को 300 राहत शिविरों में रखा है.