मंगलवार, 09 सितंबर, 2008 को 03:26 GMT तक के समाचार
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश आगामी कुछ महीनों में अफ़ग़ानिस्तान में और अमरीकी सैनिक भेजने की घोषणा करनेवाले हैं.
बुश की इराक़ के बजाए मैरीन बटालियन अफ़ग़ानिस्तान में तैनात करने की योजना है.
इसके अलावा अफ़ग़ानिस्तान में अगले साल की शुरुआत में सेना की एक ब्रिगेड भेजी जा सकती है. इस ब्रिगेड में तीन से चार हज़ार सैनिक होते हैं.
राष्ट्रपति बुश कह सकते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में सबसे कड़े दुश्मनों से मुक़ाबला है.
साथ ही वो इराक़ से लगभग आठ हज़ार सैनिकों की अगले साल फ़रवरी में वापसी की घोषणा कर सकते हैं.
इस समय इराक़ में लगभग एक लाख 46 हज़ार और अफ़ग़ानिस्तान में 33 हज़ार अमरीकी सैनिक तैनात हैं.
प्राथमिकता
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान विद्रोहियों के साथ लड़ाई अगले राष्ट्रपति की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी भले ही वो किसी भी राजनीतिक दल से हों.
अफ़ग़ानिस्तान में इस समय अनुमानित तौर पर सात हज़ार से दस हज़ार सैनिकों की कमी है.
अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के कमांडर महीनों से कहते रहे हैं कि उन्हें तालेबान विद्रोहियों से निपटने के लिए अतिरिक्त फौज की ज़रूरत है क्योंकि तालेबान के हमले पिछले दो साल से बढ़ते ही जा रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान सरकार और नैटो के सेनाओं को तालेबान लड़ाकों से काफ़ी जूझना पड़ रहा है.
गत 13 जून को तालेबान ने कंधार के जेल पर हमला कर वहाँ के सभी क़ैदियों को छुड़ा दिया था इसमें लगभग 350 तालेबान लड़ाके थे.
ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीका के नेतृत्व वाली फौज़ के हमले ने 2001 के अंत में तालेबान सरकार को गिरा दिया था.