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रविवार, 07 सितंबर, 2008 को 10:26 GMT तक के समाचार

आलोक कुमार
बीबीसी संवाददाता

बाढ़ की आपाधापी में बाल तस्करी

बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में पानी घटने की ख़बर जहाँ राहत पहुँचाती है वहीं अब कुछ ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनसे मानवता शर्मसार होती है.

'ग़ैर सरकारी संगठन बचपन बचाओ आंदोलन' और 'सेव द चिल्ड्रेन' ने बिहार के बाढ़ प्रभावित दो ज़िलों से दस बच्चों को बाल तस्करों के गिरोह से छुड़ाया है.

इनमें से कुछ बच्चे ऐसे हैं जो कोसी के क़हर से जान बचाकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुँचने की जद्दोजहद के बीच अपने परिजनों से अलग हो गए.

सेव द चिल्ड्रन के बिहार प्रभारी प्रभात कुमार कहते हैं, "ये तो छुड़ाए गए बच्चों की संख्या है. न जाने कितने बच्चे अभी तक पंजाब, कोलकाता या दिल्ली पहुँच गए होंगे."

उनका कहना है बाढ़ की आपाधापी में दिल्ली, पंजाब और कोलकाता के दलाल भी दूर दराज़ के गाँवों तक पहुँच गए.

ये दलाल दो तरह से अपनी रणनीति को अंजाम देते हैं. प्रभात कुमार का कहना है, "उनके निशाने पर परिजनों से बिछुड़े बच्चे होते हैं. इसके अलावा वो ग़रीब माँ-बाप को बच्चे को काम दिलाने का झाँसा देकर भी ले जा रहे हैं."

प्रलोभन

सेव द चिल्ड्रेन के कार्यकर्ताओं ने अररिया ज़िले से चार ऐसे बच्चों को छुड़ाया है जिन्हें कहीं और ले जाया जा रहा था. प्रभात कुमार ने बताया कि इन बच्चों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है.

अररिया के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद अली सिद्दीकी कहते हैं, "जब सामान्य स्थिति में ऐसे लोग सक्रिय रहते हैं तो अभी तो हालत बेहद ख़राब है. ये सच है कि इसका फ़ायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं."

इसी तरह कटिहार रेलवे स्टेशन से बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने छह बच्चों को तस्करों के गिरोह से आज़ाद कराया है.

बचपन बचाओ आंदोलन के कैलाश सत्यार्थी बताते हैं, "इन बच्चों के साथ-साथ हमने स्टेशन से ही दो तस्करों को भी पकड़ लिया लेकिन एक भागने में कामयाब रहा. दूसरे को हमने रेल पुलिस के हवाले किया है."

वो बताते हैं, "पकड़ा गया दलाल इन बच्चों को कोलकाता ले जा रहा था जहाँ इन्हें ढाबों में रखने की योजना थी. इन सभी बच्चों की उम्र दस से बारह साल के बीच है."

कैलाश सत्यार्थी का कहना है, "बाढ़ से लगभग तीस लाख लोग प्रभावित हुए हैं. इनमें से 10 से 12 लाख बच्चे हैं. मज़दूरी और बटाईदारी खेती करने वाले लोगों को बाहर से आए दलाल झाँसा देने में कामयाब हो जाते हैं और कई बार माँ-बाप की रज़ामंदी से बच्चों के ले जाते हैं."

ऊहापोह

बाढ़ प्रभावित ज़िलों का दौरा करने वाले राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री नीतीश मिश्र ने बाल तस्करी के मामलों पर कहा, "देखिए, अभी तक आधिकारिक रुप से हमारे पास कोई जानकारी नहीं है. लेकिन हम इससे इनकार भी नहीं कर सकते. आपने बताया है तो हम सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने को कहेंगे."

नीतीश मिश्र के अलावा ग़ैर सरकारी संगठन के लोग भी मानते हैं कि विपदा की इस घड़ी में जान बचाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है शायद इसी का फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं.

नीतीश मिश्र कहते हैं, "ये समझने वाला पहलू है. जिन लोगों के पास कुछ बचा ही नहीं, वे ऐसे लोगों के प्रलोभन में आ जाते हैं. इसलिए हमारी पहली प्राथमिकता उजड़ गए लोगों को फिर से इस लायक बनाने की है कि वो अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें."

इस आपाधापी के बीच बचपन बचाओ आंदोलन ने प्रशासन के सहयोग से जन निगरानी समितियाँ बनाई हैं जिनके सदस्यों को सहरसा, बरौनी, मधेपुरा, कटिहार और दरभंगा रेलवे स्टेशन पर तैनात किया गया है.

सेव द चिल्ड्रेन के प्रभात कुमार बताते हैं, "अभी आवश्यकता हर कैंप में एक अधिकारी मुस्तैद करने की है. साथ ही रेलवे स्टेशनों पर कड़ी निगरानी रखने की ज़रूरत है."

बचपन बचाओ आंदोलन ने रेलवे से भी सहयोग माँगा है. कैलाश सत्यार्थी बताते हैं, "अगर टिकट निरीक्षक चाहें तो इस तरह के मामलों को आसानी से पकड़ सकते हैं. इसलिए हमने रेल मंत्री से भी चिट्ठी लिख कर सहयोग माँगा है."