शुक्रवार, 05 सितंबर, 2008 को 00:42 GMT तक के समाचार
सिंगुर में नैनो कार परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार और ममता बनर्जी के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का एक दौर शुक्रवार की शाम ख़त्म हुआ.
राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी की मध्यस्थता में हुई यह बैठक साढ़े तीन घंटे चली.
हालांकि अभी इस बैठक का विवरण नहीं दिया गया है लेकिन राज्यपाल ने कहा है कि बैठक सार्थक और उपयोगी रही है.
उन्होंने बताया कि अगले दौर की बातचीत शनिवार को सुबह 11 बजे होगी.
संकेत मिले हैं कि सरकार ने एक वैकल्पिक प्रस्ताव रखा है.
पहले यह बैठक सुबह दस बज़े से शुरु होने वाली थी लेकिन राज्यपाल के कहने पर इसे शाम तक के लिए स्थगित किया गया था.
सिंगुर में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर पैदा हुए गतिरोध के कारण सिंगुर से प्रतीक्षित लखटकिया कार नैनो पर भी सवाल पैदा हो गया है.
अगर दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाता है तो टाटा किसी और शहर या राज्य में अपनी परियोजना को स्थानांतरित कर सकता है.
बैठक
राजभवन में हुई इस बैठक में सरकार की ओर से उद्योग मंत्री निरुपम सेन, पंचायत मंत्री सूर्यकांत मिश्रा और मुख्यसचिव अमित किरण देव मौजूद थे.
उधर ममता बैनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की ओर से विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता पार्थो चटोपाध्याय सहित तीन नेता मौजूद थे.
इसके अलावा राज्य सरकार के कई आला अफ़सर भी इस बैठक में थे.
बैठक के बाद पार्थो चटोपाध्याय सिंगुर को रवाना हुए हैं और उन्होंने कहा है कि ममता बैनर्जी से बातचीत के बाद ही वे इसकी जानकारी मीडिया को देंगे.
बैठक में मौजूद अधिकारियों का कहना है कि बैठक के बीच एक समय ऐसा आया था कि तृणमूल कांग्रेस के नेता बैठक छोड़कर जाने को तैयार हो गए थे लेकिन फिर सरकार ने एक वैकल्पिक प्रस्ताव रखा.
तृणमूल कांग्रेस के नेता इस विकल्प पर विचार करने को तैयार हो गए हैं.
इस बैठक से पहले राज्यपाल गांधी और मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य ने ममता बैनर्जी से सिंगुर में धरना ख़त्म करने का अनुरोध किया था.
इसके जवाब में ममता बैनर्जी ने कहा है कि उनके कार्यकर्ता शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं और वे कोई राजनीति नहीं कर रहे हैं.
वहाँ बैठी ममता बैनर्जी पेंटिंग कर रही हैं.
इस बीच दुर्गापुर एक्सप्रेस हाइवे को खाली कर दिया गया है और वहाँ आवागमन शुरु हो चुका है.
विवाद
सिंगुर में तृणमूल कांग्रेस के आंदोलन को देखते हुए टाटा मोटर्स ने नैनो कार के निर्माण का काम बंद कर दिया है और कारखाने के लिए वैकल्पिक जगह की तलाश पर विचार शुरू कर दिया है.
टाटा समूह का कहना है कि कारखाने के पास की स्थितियाँ प्रतिकूल हैं. ऐसी कि कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं और कारखाने में कामकाज रुका हुआ है.
तृणमूल कांग्रेस की माँग है कि जो किसान ज़मीन नहीं देना चाहते हैं, उनकी चार सौ एकड़ ज़मीन वापस की जाए.
हालांकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि पार्टी नहीं चाहती है कि टाटा सिंगुर से जाएँ, उनका कहना है कि जिस ज़मीन पर कारखाना बना है, उसके लिए ज़मीन ज़बरदस्ती अधिग्रहीत की गई है.