शुक्रवार, 05 सितंबर, 2008 को 04:10 GMT तक के समाचार
मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, बाढ़ प्रभावित इलाक़ों से
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि अभी बाढ़ का ख़तरा बना हुआ है, इसलिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बने रहना चाहिए.
उधर असम में भी ब्रह्मपुत्र और सहयोगी नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और लगभग बीस लाख लोग प्रभावित हुए हैं.
अधिकारियों का कहना है कि कम से कम 15 लोग तेज़ धार में बह गए हैं और हज़ारों लोग बेघर हुए हैं.
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को सहरसा में राहत और बचाव कार्य का जायज़ा लिया.
उन्होंने कहा, "अभी बारिश का मौसम बाकी है. पानी ज़्यादा होने पर नेपाल से और पानी छोड़ा जा सकता है. इसलिए थोड़ा पानी घटने के बाद वापस लौट रहे लोगों से मेरी अपील है कि वे 15 अक्तूबर तक सुरक्षित स्थानों पर ही रहें."
अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो दिन से कोसी नहीं का जलस्तर घट रहा है. जिसे देखते हुए बाढ़ में फँसे लोग अब वहाँ से निकलना नहीं चाहते.
वे अपनी संपत्ति की रक्षा करने के लिए वहाँ रहना चाहते हैं.
इस बीच भागलपुर में गंगा का पानी कई गाँवों में घुस गया है. गंगा का जलस्तर बढ़ने से कोसी के क़हर से प्रभावित गाँवों में नई मुसीबत आ सकती है.
तटबंध टूटने के बाद कोसी नदी की नई धारा भागलपुर के निकट कुरुसेला में गंगा से मिलती है.
लेकिन गंगा में जलस्तर बढ़ने से कोसी का पानी गंगा में समाहित होने की बज़ाए वापस लौटेगा और इससे स्थिति गंभीर हो सकती है.
बदहाल राहत शिविर
राहत शिविरों में रह रहे लोग वहाँ के इंतज़ाम से परेशान हैं. उनकी शिकायत है कि न तो खाना ठीक मिल रहा है और न बीमार लोगों को दवाएँ मिल रही हैं.
कोसी नदी में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राज्य सरकार ने 256 राहत शिविर बनाए हैं.
इन शिविरों में करीब ढाई लाख लोग रह रहे हैं.
बाढ़ पीड़ितों के लिए ग़ैर सरकारी संस्थाओं ने भी सैंकड़ों राहत शिविर बनाए हैं.
सहरसा में बने सबसे बड़े राहत शिविर में रह रहे लोगों ने बताया कि शिविर में इंतज़ाम ठीक नहीं है. उन्हें बहुत ही ख़राब हालत में लोगों को रहना पड़ रहा है.
सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के इलाज़ के लिए 116 स्वास्थ्य शिविर बनाए हैं.
लोगों ने बताया कि इनमें केवल सर्दी, खाँसी और बुखार जैसी साधारण बीमारियों की ही दवाएँ दी जा रही हैं. जलजनित बीमारियों की दवाओं का अभाव है.