गुरुवार, 04 सितंबर, 2008 को 21:32 GMT तक के समाचार
भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर एनएसजी के दूसरे दौर की बातचीत का क्रम निर्णायक स्थिति में पहुँच गया है.
माना जा रहा है कि इस बैठक में आम सहमति बनना ही दोनों देशों के बीच परमाणु क़रार के भविष्य को तय करेगा.
विएना से वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन ने बताया कि गुरुवार को एनएसजी के सदस्यों की बातचीत का दूसरे दौर का क्रम सुबह से ही शुरू हो गया था.
इसके बाद चार घंटे के बाद दोबारा बातचीत शुरू हुई और तमाम देशों के राजदूतों और प्रतिनिधियों से जो संकेत मिल रहे हैं उससे लग रहा है कि क़रार के मुद्दे पर सहमति का फ़ासला पिछली बार की बातचीत की अपेक्षा कम ही हुआ है.
हालांकि एक सहमति जैसी स्थिति अभी नहीं बन पाई है पर माना जा रहा है कि आज की बातचीत किसी आम सहमति तक पहुँच सकती है.
एनएसजी में अमरीकी रिपोर्ट
दो दिन पहले ही एक अमरीकी अख़बार में छपी रिपोर्ट से उठे विवादों के बीच गुरुवार को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) के देशों की बैठक जब शुरू हुई थी तो माना जा रहा था कि यह मुद्दा भी इस बैठक में गर्माएगा.
हालांकि ऐसा होता कम ही दिखा और कुछेक देशों के अलावा बाकी प्रतिनिधि इस मुद्दे पर ज़्यादा ध्यान देते नज़र नहीं आए.
दो तीन देशों ने यह तर्क रखा कि अगर अमरीका परमाणु परीक्षण जैसी स्थिति में भारत के लिए हाइड एक्ट जैसा प्रावधान रख सकता है तो एनएसजी में ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता है.
पर इस तर्क का अधिकतर देशों ने समर्थन नहीं किया है या एनएसजी में ऐसा करने के प्रति अपनी सहमति नहीं दर्शाई है.
वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने बुश प्रशासन की ओर से वहाँ की संसद की विदेशी मामलों की समिति के सदस्यों को लिखा एक पत्र छापा है जिसमें कहा गया है कि यदि भारत परमाणु परीक्षण करता है तो उसे परमाणु ईंधन की आपूर्ति रोक दी जाएगी.
ये राह नहीं आसाँ
गुरुवार की रात की बातचीत का सिलसिला शुरू होने के साथ ही भारत-अमरीका परमाणु क़रार एक बेहद नाज़ुक दौर में जाता नज़र आ रहा है.
जानकार मानते हैं कि अगर गुरुवार की देर रात विएना में इस क़रार पर एनएसजी के सदस्य देश आम सहमति नहीं बना पाते हैं तो इस क़रार के मुद्दे पर दोनों देशों की सरकारों का आगे जा पाना आसान नहीं होगा.
विएना से सिद्धार्थ वरदराजन कहते हैं, "अगर इस दूसरे दौर की बातचीत में आम सहमति नहीं बनती है तो तीसरे दौर में जाने के लिए न तो सदस्य देश तैयार दिखते हैं और न ही दोनों देशों की सरकारों के लिए ताज़ा राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनज़र ऐसा कर पाना संभव होगा."
अब ऐसी सूरत में गुरुवार की बातचीत पर सभी की नज़र है और ज़ाहिर है कि भारत और अमरीका की ओर से इस बार आम सहमति बनवाने की पूरी कोशिश की जाने की उम्मीद है.