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'सिमी पर श्वेत पत्र जारी करे सरकार'

विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सरकार से माँग की है कि सिमी सहित सभी चरमपंथी संगठनों के बारे में सरकार एक 'व्हाइट पेपर' जारी करे.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय में बुधवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में आडवाणी ने कहा, "मैं जानता हूँ कि सरकार के पास 'श्वेत पत्र' जारी करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है."

किसी मामले से संबद्ध जानकारी को पूरी पारदर्शिता के साथ सामने रखा जाता है तो उसे श्वेत पत्र या व्हाइट पेपर कहते हैं.

नरम रुख़

आडवाणी ने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे लोग सिमी का समर्थन कर रहे हैं. इससे चरमपंथियों का साहस बढ़ा है और वे मज़बूत हुए हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार यह स्वीकार करे की वह चरमपंथी संगठनों पर रोक लगाने पाने में नाकाम रही है और आतंकवाद को लेकर गंभीर नहीं है. उन्होंने इसे गृह मंत्रालय की विफलता बताया.

चरमपंथी घटनाओं को रोकने के लिए उन्होंने पोटा जैसे क़ानून की आवश्यकता पर जोर दिया.

आडवाणी ने कहा कि गुजरात सरकार ने एनडीए सरकार के कार्यकाल में आतंकवाद से लड़ने के लिए एक क़ानून बनाने का प्रस्ताव भेजा था. केंद्र सरकार ने कुछ संशोधन का सुझाव देकर उसे गुजरात सरकार को वापस भेज दिया था.

आडवाणी के मुताबिक़, गुजरात सरकार ने संशोधन कर उस प्रस्ताव को फिर केंद्र सरकार को भेज दिया था. लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाली "यूपीए सरकार ने उस पर आज तक कोई निर्णय नहीं लिया है".

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि महाराष्ट्र सरकार चरमपंथियों को ‘मकोका’ जैसे क़ानूनों के कारण ही पकड़ पाई है.

इसके जवाब में कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि अब पोटा जैसे क़ानून की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उसमें आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रावधान थे उनका अन्य क़ानूनों में समावेश कर दिया गया है.

सिमी पर प्रतिबंध के सवाल पर उन्होंने कहा कि केवल सिमी ही नहीं बल्कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.