रविवार, 31 अगस्त, 2008 को 16:55 GMT तक के समाचार
मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, बिहार
बिहार में कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से दिनों-दिन बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है. राज्य के कई और इलाक़ों में पानी भर गया है. जबकि कई गाँव पूरी तरह डूब चुके हैं.
बाढ़ के कारण लाखों लोग बेघर हैं और अभी तक राहत कार्य सभी प्रभावित लोगों तक नहीं पहुँच सका है. प्रभावित लोगों में ग़ुस्सा बढ़ रहा है.
राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि अब राहत और बचाव कार्य में सेना की मदद भी ली जा रही है. फ़िलहाल सेना की पाँच टुकड़ियों को तैनात किया गया है.
शनिवार की रात सहरसा, सुपौल, अररिया और मधेपुरा ज़िलों में कोसी नदी का जलस्तर दो से तीन फ़ीट और बढ़ गया है.
सहायता
प्रदेश आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि अभी तक चार लाख लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है जबकि डेढ़ लाख लोग 170 शिविरों में रह रहे हैं.
लेकिन बाढ़ का प्रकोप इतना ज़्यादा है कि प्रभावित लोगों तक सहायता नहीं पहुँच पा रही है.
चारों प्रभावित ज़िलों के लोग नाराज़ है और उनकी मांग है कि ये ज़िले सेना को सौंप दिए जाए क्योंकि अब भी लाखों लोग बाढ़ में फँसे हुए हैं.
सहरसा के एक राहत शिविर में रह रहे मधेपुरा के मुंडेश्वर यादव काफ़ी नाराज़ हैं और उनका कहना है- राज्य सरकार इन ज़िलों को सेना के हवाले कर दे ताकि लाखों लोगों की जान बचाई जा सके.
राहत शिविर में रह रहे एक और बाढ़ पीड़ित भोला शाह ने कहा, "लोगों के सब्र का बाँध टूट रहा है. राज्य सरकार पर से हमारा भरोसा उठ गया है."
चुनौती
रविवार को कोसी नदी के टूटे तटबंध से एक बार फिर दो लाख क्यूसेक पानी बिहार में पहुँच गया. राज्य सरकार के अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं कि स्थिति काफ़ी ख़राब है और लोगों तक राहत नहीं पहुँच पा रही.
अभी तक बाढ़ में 80 लोगों के मारे जाने का समाचार है. राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री नीतीश मिश्रा का कहना है कि उनके विभाग के सामने एक कड़ी चुनौती है.
नीतीश मिश्रा ने कहा, "बाढ़ के कारण बहुत बड़ा इलाक़ा प्रभावित है और उसकी तुलना में संसाधन काफ़ी कम हैं. एक हज़ार से ज़्यादा गाँव पूरी तरह डूब गए हैं. हमारे और नावों की आवश्यकता है."
इस बीच संयुक्त राष्ट्र बालकोष (यूनिसेफ़) के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में बीमारी फैलने की आशंका है और स्थिति से निपटने में काफ़ी समय लगेगा.