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अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

पीडीपी ने समझौते की आलोचना की

अमरनाथ ज़मीन विवाद को लेकर भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर सरकार और संघर्ष समिति के बीच हुए समझौते की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने आलोचना की है तो दूसरी ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इसका स्वागत किया है.

पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने इस समझौते को ठुकरा दिया है.

उनका कहना था,'' केंद्र सरकार ने फ़ैसला एकतरफ़ा किया है और इसमें राज्य की बहुसंख्यक आबादी की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा गया है.''

उनका कहना था,'' इस मामले में कोई भी फ़ैसला आम सहमति से लिया जाना चाहिए था.''

महबूबा मुफ़्ती ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने कश्मीर की समन्वय समिति को विश्वास में नहीं लिया.

पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जम्मू के तुष्टीकरण से कश्मीर में अलगाववादी भावना को बल मिलेगा.

उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू आंदोलन में कांग्रेस और भाजपा की मिलीभगत थी.

दूसरी ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुख़ अब्दुल्ला ने समझौते का स्वागत करते हुए इसे बहुत अच्छा संकेत बताया.

उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य में पिछले दो महीने से भूमि हस्तांतरण को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त हो जाएगा.

कश्मीर में विरोध शुरू

पिछले दो महीने से इसी भूखंड के लिए राज्य में विरोध-प्रदर्शनों का दौर चल रहा था. अब जम्मू में प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा तो हो गई है पर कश्मीर में प्रदर्शन फिर से शुरू हो गए हैं.

समझौते के विरोध में पृथकतावादियों की समन्वय समिति ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन का आह्नान किया है.

रविवार को श्रीनगर में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को रबर की गोलियाँ चलानी पड़ी जिसमें एक व्यक्ति घायल हो गया है.

श्रीनगर के पुराने इलाके में कर्फ़्यू में जो ढील दी गई थी, उसे भी वापस ले लिया गया है और कर्फ़्यू फिर से लागू हो गया है.

गौ़रतलब है कि अमरनाथ ज़मीन विवाद को लेकर जम्मू-कश्मीर सरकार और अमरनाथ संघर्ष समिति के बीच रविवार को समझौता हो गया था जिसके अनुसार 40 हेक्टेअर की भूमि मंदिर बोर्ड को इस्तेमाल के लिए दी जाएगी.

अमरनाथ ज़मीन विवाद निपटारे के लिए जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा ने चार सदस्यीय समिति बनाई थी जो लगातार अमरनाथ संघर्ष समिति से बातचीत कर रही थी.

समझौते के बाद संघर्ष समिति ने अपनी 15 माँगें रखी थीं जिसमें से कई सरकार ने मान लीं.

इसके तहत राज्य सरकार अमरनाथ यात्रा के दौरान 40 हेक्टेयर ज़मीन मंदिर बोर्ड को दे देगी. लेकिन इस दौरान इसके मालिकाना हक़ में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.