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मंगलवार, 26 अगस्त, 2008 को 09:20 GMT तक के समाचार

नवाज़ साहब हमारे साथ रहें: ज़रदारी

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से सत्ताधारी गठबंधन में लौट आने की अपील की है.

सोमवार को नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ने बर्खास्त जजों की बहाली और कुछ अन्य मुद्दों पर मतभेद के बाद सत्ताधारी गठबंधन से अपने को अलग कर लिया था.

एक टेलीविज़न इंटरव्यू में ज़रदारी ने कहा, "हमें नवाज़ शरीफ़ के निर्णय का दुख है. हम एक साथ आगे बढ़ना चाहते हैं ताकि देश के सामने जो चुनौतियाँ हैं उसका समाधान कर सकें."

उन्होंने कहा, "हम नवाज़ शरीफ़ से सत्ताधारी गठबंधन में शामिल होने के लिए आग्रह करेंगे."

इससे पहले नवाज़ शरीफ़ ने कहा था कि ज़रदारी के नेतृत्व वाली पीपीपी ने कई वादों को तोड़ा है इस वजह से वे गठबंधन को छोड़ रहे हैं.

ज़रदारी ने अपने संबोधन में कहा है कि यदि शरीफ़ की 'भवानाओं को ठेस लगी है' तो वे उनसे 'माफ़ी माँगेंगे'.

उन्होंने कहा, "हमारे सामने गंभीर चुनौतियाँ हैं. शायद हम देश को पूरी सच्चाई नहीं बता पाएँ. हम चाहते हैं कि नवाज़ शरीफ़ हमारे साथ रहें."

ज़रदारी ने कहा कि पीपीपी और पीएमएल (नवाज़) का वजूद एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और वे देश मे लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने में नवाज़ शरीफ़ का सहयोग चाहते हैं.

मतभेद

पाकिस्तान के अगले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच मतभेद हैं.

पीएमएल (नवाज़) की ओर से पूर्व मुख्य न्यायाधीश सईदुजमां सिद्दीक़ी छह सितंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में पार्टी के उम्मीदवार होंगे.

जबकि आसिफ़ अली ज़रदारी पीपीपी की तरफ़ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि पीपीपी को डर है कि अगर बर्खास्त जजों की बहाली की गई तो वे पिछले वर्ष ज़रदारी और बेनज़ीर भुट्टो को पाकिस्तान वापसी की अनुमति को ख़ारिज कर देंगें.

अगर हटाए गए जज दोबारा आए तो इससे ज़रदारी के ऊपर लंबे समय से भ्रष्टाचार के जो आरोप दबे पड़े हैं वे एक बार फिर खुल सकते हैं.

इस्लामाबाद में बीबीसी के संवाददाता चार्ल्स हेवीलैंड का कहना है कि सत्ताधारी गठबंधन से पीपीपी के हट जाने से फ़िलहाल सरकार की सेहत पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ेगा.

शरीफ़ का कहना है कि राष्ट्रपति का पद जब तक ताक़तवर बना रहता है, एक ऐसा व्यक्ति राष्ट्रपति बने जो दलगत भावनाओं से ऊपर हो और जिसे सभी स्वीकार करें. ऐसे में ज़रदारी के नाम पर सहमति नहीं बन सकती थी.

ग़ौरतलब है कि ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ दोनों ने मिलकर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के ऊपर महाभियोग लाने का दबाव बनाया था, जिससे पिछले हफ़्ते उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया.