मंगलवार, 26 अगस्त, 2008 को 03:45 GMT तक के समाचार
बीनू जोशी
बीबीसी संवाददाता, जम्मू
अमरनाथ संघर्ष समिति ने आगे बातचीत करने के लिए शर्त रखते हुए कहा है कि सरकार पहले कुछ पुलिस अधिकारियों का वहाँ से तबादला करे.
जिन अधिकारियों के तबादले की शर्त रखी गई है उनमें जम्मू क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) और जम्मू के दो ज़िलों के वरिष्ठ पुलिस अक्षीक्षक (एसएसपी) हैं.
अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने के मामले को लेकर अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति पिछले दो महीनों से जम्मू में आंदोलन कर रही है और लंबे हिंसक आंदोलन के बाद सरकार से बातचीत करने को राज़ी हुई है.
संघर्ष समिति और सरकार के बीच तीन दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन सिवाय इसके किसी बात पर सहमति नहीं बनी है कि बातचीत आगे जारी रहे.
लेकिन सोमवार को देर शाम संघर्ष समिति ने आगे बातचीत के लिए शर्तें रख दी हैं.
आरोप
अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति के संयोजक लीला करण शर्मा ने पत्रकारों से बात करते हुए पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाए कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर ज़्यादतियाँ कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "सरकार जब तक जम्मू क्षेत्र के आईजी और जो ज़िलों जम्मू और कठुआ के एसएसपी के तबादले नहीं कर देती संघर्ष समिति आगे की बातचीत नहीं करेगी."
उन्होंने एक केंद्रीय समिति को जम्मू में भेजने की भी माँग की है जो आकर आंदोलन से होने वाले नुक़सान का आकलन करे.
शनिवार को ही संघर्ष समिति और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत ख़त्म हुई. हालांकि इसमें कोई निर्णय नहीं निकल सका था लेकिन दोनों ही पक्षों ने इसे 'सकारात्मक और सार्थक' कहा था.
मंगलवार को दोनों पक्षों के बीच अंतिम दौर की बातचीत होनी थी.
इन शर्तों पर अभी सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
संघर्ष समिति को क़रीब 50 राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और व्यावसायिक संगठनों का समर्थन हासिल है.
एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि 'संघर्ष समिति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के हाथों की कठपुतली बन गई दिखती है और उसी के इशारे पर काम कर रही है.'
उनका कहना है कि हिंदूवादी संगठन आरएसएस चाहता है कि यह मामला अभी ख़िंचता रहे जिससे कि इसका फ़ायदा चुनावों में मिल सके.