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शुक्रवार, 22 अगस्त, 2008 को 17:36 GMT तक के समाचार

राष्ट्रपति पद के लिए ज़रदारी उम्मीदवार

सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने बेनज़ीर भुट्टो के विधुर आसिफ़ अली ज़रदारी को राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया है.

राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने की धमकियों के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने सोमवार को राष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

हालांकि पीपीपी के साथ गठबंधन में शामिल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता नवाज़ शरीफ़ नहीं चाहते कि आसिफ़ अली ज़रदारी राष्ट्रपति का पद संभालें.

आसिफ़ अली ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ के बीच इस बात को लेकर भी मतभेद रहा है कि बर्खास्त किए गए जजों में से कितने जजों की बहाली की जाए.

इन जजों को पिछले साल नवंबर में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने बर्खास्त कर दिया था.

हालांकि अब कहा जा रहा है कि इस मसले पर मतभेद सुलझा लिए गए हैं.

शुक्रवार को ही पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि देश में राष्ट्रपति पद के लिए छह सितंबर को चुनाव होंगे.

फ़ैसला 24 घंटों में

पीपीपी की प्रवक्ता शेरी रहमान ने इस्लामाबाद में पत्रकारों को बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने एकमत से ज़रदारी को राष्ट्रपति पद के लिए नामांकित करने का फ़ैसला किया है.

ज़रदारी पीपीपी के सह-अध्यक्ष भी हैं.

उन्होंने कहा, "ज़रदारी ने पीपीपी के प्रति आभार जताया है और कहा है कि वे 24 घंटों के भीतर अपने निर्णय की घोषणा कर देंगे."

सत्ता में आने के बाद से पीपीपी और पीएमएल-एन इस बात की चर्चा करते रहे हैं कि राष्ट्रपति के अधिकारों में किस तरह से कटौती की जाए, लेकिन अब यह स्पष्ट नहीं है कि ज़रदारी के राष्ट्रपति बनने की सूरत में भी क्या अधिकारों में कटौती की जाएगी.

आसिफ़ अली ज़रदारी ने पिछले साल दिसंबर में अपनी पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की मौत के बाद पीपीपी की कमान संभाली थी.

राष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्य और देश की चार विधानसभा के सदस्य मिलकर करते हैं.

सहमति

इस बीच जजों की बहाली के मुद्दे पर सत्तारुढ़ गठबंधन में सहमति बन गई है.

इसी के साथ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) का गठबंधन टूटने की अटकलें ख़त्म हो गई है.

दोनों दलों के बीच शुक्रवार को हुई बैठक के बाद पीएमएलएन के नेता नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि बर्ख़ास्त किए गए जजों की बहाली के मुद्दे पर एक समिति बनाई गई है.

उनका कहना था, "यह समिति प्रस्ताव तैयार करेगी जिसे सोमवार को नेशनल असेंबली में रखा जाएगा. हमने कहा है कि इस प्रस्ताव पर सोमवार और मंगलवार को बहस कराई जाए. बुधवार को इसे पारित कर दिया जाए और इसी दिन जजों की बहाली कर दी जाए."

नवाज़ शरीफ़ से जब ये पूछा गया कि क्या वो इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को ही फिर से मुख्य न्यायाधीश बनाने के पक्ष में हैं, तो उनका कहना था, "अगर ऐसा नहीं होता है तो ये न्यायपालिका के साथ मज़ाक होगा."

ग़ौरतलब है कि तत्तकालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पिछले साल देश में आपातकाल लागू करने के साथ ही मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी समेत 60 जजों को बर्ख़ास्त कर दिया था.