सोमवार, 18 अगस्त, 2008 को 05:24 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ सोमवार को राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं.
ख़बरें हैं कि उन पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ता जा रहा है. उनके संबोधन को लेकर अटकलें तेज़ हैं.
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की सरकार ने परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने के लिए आरोपपत्र तैयार कर लिया है.
उन पर लगाए गए मुख्य आरोपों में संविधान का उल्लंघन, पद का दुरुपयोग और आपातकाल लागू करना शामिल है.
पाकिस्तानी मीडिया में इस तरह की चर्चा है कि महाभियोग प्रस्ताव पारित होने से पहले ही कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा और मुशर्रफ़ ख़ुद इस्तीफ़ा दे देंगे.
हालाँकि पाकिस्तानी राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने उनके इस्तीफ़ा देने की संभावना को ख़ारिज किया है.
मुशर्रफ़ ने पहले कहा था कि वे महाभियोग का सामना करने के बदले इस्तीफ़ा देना पसंद करेंगे लेकिन अब उनके समर्थक कह रहे हैं कि मुशर्रफ़ महाभियोग प्रस्ताव का सामना कर सकते हैं.
रास्ता निकालने की कोशिश
पिछले कई दिनों से ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि ब्रिटेन और अमरीका के कूटनयिक परवेज़ मुशर्रफ़ के लिए सुरक्षित रास्ता निकालने की कोशिश में बातचीत कर रहे हैं.
ये कूटनयिक चाहते हैं कि मुशर्रफ़ स्वेच्छा से पद छोड़ दें और उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुक़दमा न चलाया जाए.
दूसरी ओर पीएमएल (नवाज़) के शीर्ष नेता नवाज़ शरीफ़ ने ज़ोर देकर कहा है कि वे परवेज़ मुशर्रफ़ को कोई सुरक्षित रास्ता देने या उनके ख़िलाफ़ मुकदमा न चलाए जाने का वादा करने के ख़िलाफ़ हैं.
उन्होंने कहा कि परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुक़दमा चलना चाहिए.
देशद्रोह का आरोप सिद्ध होने पर फाँसी तक की सज़ा दी जा सकती है.
लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) का कहना है कि मुशर्रफ़ पर देशद्रोह का मुक़दमा चले या नहीं, इसका फ़ैसला संसद को करना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने पिछले वर्ष सेनाध्यक्ष का पद छोड़ दिया था. फ़रवरी महीने में हुए चुनाव में उनका समर्थन करने वाली पार्टियों को भारी हार का सामना करना पड़ा था.