शुक्रवार, 15 अगस्त, 2008 को 14:25 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को पद छोड़ने के बदले में 'सुरक्षित रास्ता' देने के मुद्दे पर चल रही बातचीत अपने अंतिम दौर में है.
अमरीका और ब्रिटेन की कूटनीतिक मध्यस्थता के बीच इस बात पर विस्तार से चर्चा हो रही है कि मुशर्रफ़ अगर महाभियोग से पहले पद छोड़ देते हैं तो उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह के आरोप में मुक़दमा न चलाया जाए और उन्हें राजनीतिक व्यवस्था से सहमति के आधार पर अलग होने दिया जाए.
इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस मामले पर पिछले कई दिनों से गंभीर और विस्तृत बातचीत चल रही है और संभावना है कि सोमवार तक इस बारे में कोई अहम घोषणा हो सकती है.
भारत के एक टीवी चैनल को दिए गए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बात की पुष्टि की है कि मुशर्रफ़ को सम्मानजनक तरीक़े से पद छोड़ने का विकल्प देने पर जल्दी ही कोई फ़ैसला हो सकता है.
मुशर्रफ़ समर्थक राजनीतिक दल मुस्लिम लीग (क्यू) के सीनेटर तारिक़ अज़ीम ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि "ये कोशिश चल रही है कि मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया जाए क्योंकि राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाना राष्ट्रहित में नहीं है".
मुशर्रफ़ ने कुछ दिनों पहले कहा था कि वे महाभियोग का सामना करने के बदले अपने पद से इस्तीफ़ा देना पसंद करेंगे.
अज़ीम ने बताया कि मुशर्रफ़ को सुरक्षित रास्ता देने के बारे में जो बातचीत चल रही है उसमें "वही लोग अहम भूमिका निभा रहे हैं जिन्होंने मुशर्रफ़ और बेनज़ीर भुट्टो के बीच सुलह कराई थी".
मुशर्रफ़ को महाभियोग और मुक़दमों से बचाने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिश की अगुआई पाकिस्तान में ब्रिटेन के राजदूत रहे मार्क लॉयल ग्रांट कर रहे हैं, वे इन दिनों ब्रितानी विदेश मंत्रालय में मुख्य राजनीतिक सलाहकार हैं.
ग्रांट ने पिछले कुछ दिनों में आसिफ़ ज़रदारी और परवेज़ मुशर्रफ़ से कई मुलाक़ातें की हैं.
मुशर्रफ़ का समर्थन करने वाले सीनेटर तारिक़ अज़ीम ने कहा, "राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को सुरक्षित रास्ता देने का मतलब ये नहीं है कि वे देश छोड़कर जा रहे हैं, मुझे पक्का यक़ीन है कि वे पाकिस्तान में ही रहेंगे, हमारी पार्टी पूरी तरह उनके साथ है. महाभियोग का सामना करने या पद छोड़ने का फ़ैसला राष्ट्रपति ख़ुद करेंगे."
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री अहमद मुख़्तार ने कहा है कि मुशर्रफ़ के साथियों ने उन्हें सुरक्षित रास्ता देने के लिए सरकार से बातचीत शुरू की है.
उन्होंने कहा कि इस मामले पर बहुत सारे मुद्दों को सुलझा लिया गया है और जल्द ही कोई घोषणा होगी.
मोलभाव
पाकिस्तान के शीर्ष आधिकारिक सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि मुशर्रफ़ पहले पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे, जब उन पर दबाव बढ़ा तो उन्होंने एसेम्बली को भंग करने और राज्यपालों को नियुक्त करने के अपने अधिकारों को छोड़ने का प्रस्ताव रखा.
जानकारों का कहना है कि महाभियोग को टलता न देखकर मुशर्रफ़ ने पद छोड़ने के लिए कई शर्तें रखी हैं, मसलन, संविधान को स्थगति करने, जजों को हटाने, इमरजेंसी लगाने जैसे उनके फ़ैसलों को बदला न जाए, पद छोड़ने के बाद पूर्व राष्ट्रपति के तौर पर उन्हें सभी फ़ायदे मिलें और उनके साथ प्रोटकॉल के अनुरूप बर्ताव हो और उनके ख़िलाफ़ कोई मुकदमा न चलाया जाए.
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के एक वरिष्ठ नेता चौधरी निसार अली ने कहा, "परवेज़ मुशर्रफ़ अपने गुनाहों की सज़ा माफ़ करना चाहते हैं और बाक़ी ज़िंदगी सुकून से गुज़ारना चाहते हैं लेकिन हमारा रुख़ बिल्कुल स्पष्ट है, उन्हें कोई सुरक्षित रास्ता देने के हम पक्ष में नहीं हैं, उनका अगला मुकाम इंसाफ़ का कटघरा होना चाहिए."
मुशर्रफ़ पिछले ही साल सेनाध्यक्ष का पद छोड़ चुके हैं और संकेत यही हैं कि उन्हें पद पर बने रहने के लिए सेना का समर्थन हासिल नहीं है.