http://www.bbcchindi.com

शुक्रवार, 15 अगस्त, 2008 को 10:17 GMT तक के समाचार

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

कश्मीर: प्रदर्शनकारियों पर फिर फ़ायरिंग

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़पों में कई लोग घायल हो गए हैं.

हब्बा कदल के नज़दीक स्थानीय लोग केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ़ के कैंप को हटाने की माँग कर रहे थे.

उग्र भीड़ पर अर्धसैनिक बल के जवानों ने फ़ायरिंग कर दी और आँसू गैस के गोले भी छोड़े.

इसके बाद स्थानीय अस्पताल में अफ़रा-तफरी का माहौल रहा. हालाँकि ये पत नहीं चला है कि कितने लोगों को गोलियाँ लगी हैं.

काले झंडे

श्रीनगर में शुक्रवार को कई जगहों पर काले झंडे दिखाकर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए हैं.

जुमे की नमाज़ के बाद घाटी में जगह-जगह कुछ और विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

नौहाटा, काठीदरवाज़ा और डलगेट से हज़ारों लोगों ने राजधानी श्रीनगर की ओर मार्च किया. वे काले झंडे उठाए हुए थे और उनमें से कुछ के हाथ में भारतीय केंद्रीय रिज़र्व पुलिस के प्रतीकात्मक पुतले भी थे.

शुक्रवार को पूरे भारत में आज़ादी की 61 वीं वर्षगाँठ पर कई सरकारी- ग़ैरसरकारी आयोजन हो रहे हैं.

पर श्रीनगर में जनजीवन पूरी तरह से ठप्प है क्योंकि वहाँ अलगाववादी गुटों की ओर से बंद का आहवान किया गया है.

इन गुटों ने शुक्रवार यानी 15 अगस्त के दिन को कालादिवस के तौर पर दर्ज कराने की अपील आम नागरिकों से की थी.

इस दौरान कुछ जगहों पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों की सूचना मिल रही है. लोगों ने काले झंडे दिखाकर अपना विरोध व्यक्त किया है.

तनावपूर्व, पर शांत घाटी

हालांकि शुक्रवार को किसी तरह की हिंसक घटना की ख़बर अभी तक राज्य से नहीं मिली है और यहाँ आज़ादी की वर्षगाँठ के मौके पर आयोजित कई सरकार कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हो गए.

पुलिस ने जानकारी दी है कि चार ज़िलों- बारामूला, बांदीपुरा, पुलवामा और शिपान से कर्फ़्यू हटा लिया गया है.

पर बारामूला के स्थानीय निवासियों ने बीबीसी को फोन पर सूचना दी कि गुरुवार से कर्फ़्यू में कोई ढील नहीं दी गई है.

शुक्रवार को राजधानी श्रीनगर के बख़्शी स्टेडियम में राज्यपाल एनएन वोहरा ने सलामी ली. उन्हें अर्धसैनिक बलों और पुलिस की परेड ने सलामी दी.

परेड में पुलिस स्कूल के बच्चे भी शामिल हुए पर श्रीनगर के नागरिकों के लिए बने सरकारी या निजी स्कूलों के बच्चे इस परेड में शामिल नहीं हुए.

यहाँ तक कि आम लोग भी इस समारोह में शामिल नहीं हो सके.