गुरुवार, 14 अगस्त, 2008 को 07:58 GMT तक के समाचार
श्रीनगर में पुलिस की फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई है जिससे तनाव और भड़क उठा है.
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी वाहनों को आग लगाने की कोशिश करने वाले लोगों पर पुलिस ने गोलियाँ चलाईं जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई.
उधर जम्मू में अमरनाथ मंदिर भूमि मामले पर एक रिटायर्ड डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली.
जम्मू में एक पुलिस अधिकारी ने बताया "डॉक्टर बलवंत राय खजूरिया ने अमरनाथ मंदिर संघर्ष समिति को अपनी सारी संपत्ति दान करके आत्महत्या कर ली, उन्होंने अपनी आख़िरी चिट्ठी में लिखा है कि वे इस पूरे मामले से बहुत दुखी हैं".
इस बीच, भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में कश्मीर घाटी के दस में से चार ज़िलों में कर्फ़्यू जारी है, हालाँकि राजधानी श्रीनगर में कर्फ़्यू में कई घंटे की ढील दी गई है.
बुधवार को घाटी के सभी ज़िलों में कर्फ़्यू जारी था. बीबीसी के श्रीनगर संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार ख़ासे तनाव के बीच पूरी रात तक कई जगहों पर नारेबाज़ी और प्रदर्शन होते रहे.
गुरुवार को बारामूला, बांदीपुरा, पुलवामा और शोपियां में कर्फ़्यू जारी है.
कश्मीर घाटी से बीबीसी संवाददाता श्याम सुंदर ने बताया है कि तनाव का एक कारण ये भी है कि अफ़वाहों का बाज़ार गर्म है. लेकिन उनका कहना है कि फ़िलहाल श्रीनगर और आसपास के इलाक़ों में शांति कायम है.
लेकिन घाटी में अब लोग शिकायत कर रहे हैं कि अनेक जगह रोज़मर्रा की ज़रूरत की सामग्री की कमी है या फिर इस सामान को बढ़े हुए दामों पर बेचा जा रहा है.
रात में सड़कों पर उतरे
बीबीसी के श्रीनगर संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार बुधवार को श्रीनगर के कई हिस्सों में नज़ारा 1990 जैसा था जब मध्य रात्रि में सैकड़ों लोग 'आज़ादी के समर्थन में' नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए.
अधिकतर लोग मस्जिदों में जमा हुए और लाऊड-स्पीकर चलाकर नारे लगाने लगे.
इससे पहले ख़बरें आई थीं कि सेना ने श्रीनगर के कुछ इलाक़ों में शाम को छापे मारे हैं. समाचार एजेंसियों के अनुसार इन लोगों का आरोप था कि सीआईपीएफ़ के जवानों ने कई घरों के शीशे तोड़ दिए हैं
सोमवार और मंगलवार को पुलिस की फ़ायरिंग में 20 लोग मारे गए थे.
बुधवार को दिन में घाटी में पुलिस की फ़ायरिंग में 30 लोग घायल हुए थे.
ज़्यादा लोग पुलवामा में तब घायल हुए जब तीन हज़ार की भीड़ ने केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआईपीएफ़) के कैंप की ओर मार्च करना शुरु किया.
अल्ताफ़ हुसैन के अनुसार घाटी के लोगों में काफ़ी गुस्सा है कि और वे पुलिस के बल प्रयोग को नाजायज़ और ज़रूरत से अधिक बता रहे हैं.
अमरनाथ मुद्दा
ये पूरा विवाद तब शुरु हुआ था जब कांग्रेस के नेतृत्व और पीडीपी के सहयोग वाली ग़ुलाम नबी आज़ाद सरकार ने अस्थायी तौर पर सौ एकड़ ज़मीन अमरनाथ यात्रियों की व्यवस्था के लिए अमरनाथ मंदिर बोर्ड को देने का फ़ैसला किया.
इस पर कश्मीर घाटी में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन हुए, पीडीपी ने सरकार में फ़ैसले के समय शामिल होने के बावजूद अपना पल्ला झाड़ लिया और सरकार से समर्थन वापस ले लिया.
हालाँकि सरकार ने ज़मीन अमरनाथ बोर्ड को देने का फ़ैसला वापस ले लिया लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार विधानसभा में समर्थन नहीं जुटा पाई और सत्ता से बाहर हो गई.
अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने का फ़ैसला वापस लेने पर और अमरनाथ यात्रा की ज़िम्मेदारी बोर्ड की जगह सरकार के हाथ में आ जाने के कारण जम्मू क्षेत्र में उग्र प्रदर्शन शुरु हो गए, जो अब भी जारी है.
जम्मू में हुए प्रदर्शनों की वजह से जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग बाधित हुआ और कश्मीर घाटी के व्यापारियों और उत्पादकों को सामान वहाँ से बाहर भेजने में ख़ासी परेशानी आने लगी.
इसीलिए हाल में कश्मीर के राजनीतिक नेताओं और कुछ अलगाववादियों ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की ओर मार्च करते हुए जाने की योजना बनाई लेकिन हज़ारों की भीड़ जमा हो गई और सुरक्षा बलों की फ़ायरिंग में अनेक लोग मारे गए.
तब से कश्मीर घाटी में तनाव व्याप्त है और प्रशासन कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर हुआ.