गुरुवार, 14 अगस्त, 2008 को 10:14 GMT तक के समाचार
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने भारत सरकार से कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग न करे.
ह्यूमन राइट्स वॉच ने अमरनाथ मंदिर ज़मीन को लेकर चल रहे विवाद में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि वे मामले का शांतिपूर्ण हल निकाले.
अमरनाथ मंदिर ज़मीन विवाद में अभी तक क़रीब 40 लोगों की जान जा चुकी है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है- इस साल जून से जम्मू-कश्मीर में मुसलमानों और हिंदुओं का आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है. क़रीब 40 लोगों ने अपनी जान गँवा दी है और सैकड़ों घायल हुए हैं. इससे इलाक़े में सांप्रदायिक नफ़रत बढ़ी है.
ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि इस हिंसा के दौर को ख़त्म करने के लिए सरकार को चाहिए कि वह अपनी सेना को संयम बरतने की सलाह दे और सभी पक्ष विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने की कोशिश करें.
संगठन का कहना है कि भारतीय सुरक्षा बलों को बल प्रयोग और हथियारों के इस्तेमाल के बारे में संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए. इन दिशा-निर्देशों के मुताबिक़ सैनिकों को बल प्रयोग से पहले अहिंसक तरीक़ों को अपनाना चाहिए.
दिशा-निर्देश
ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों के मुताबिक़ उसी समय सैनिक हथियारों का प्रयोग करें जब ज़िंदगी बचाने के लिए ऐसा ज़रूरी हो जाए.
संगठन ने भारत में आने वाले महीनों में होने वाले चुनावों का उल्लेख किया है और कहा है कि राजनीतिक पार्टियाँ और अलगाववादी संगठन हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं और अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत विवाद को हवा दे रहे हैं.
ह्यूमन राइट्स वॉच में एशिया मामलों की वरिष्ठ शोधकर्ता मीनाक्षी गांगुली का कहना है कि लगातार बढ़ रही हिंसा के कारण जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर स्थिति बदतर हो रही है.
उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं और जम्मू-कश्मीर के लोगों को आगे आकर एक ऐसे समझौते की कोशिश करनी चाहिए जो सभी पक्षों को स्वीकार हो और जिससे संकट का तत्काल हल निकल सके.
दरअसल पहले जम्मू-कश्मीर सरकार ने अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने का फ़ैसला किया लेकिन कश्मीर घाटी में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने इस फ़ैसले को वापस ले लिया. लेकिन इसके बाद जम्मू में ज़मीन वापस लिए जाने के फ़ैसले का विरोध होने लगा.