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गुरुवार, 14 अगस्त, 2008 को 02:34 GMT तक के समाचार

'राजनीतिक स्थिरता, मेलमिलाप की ज़रूरत'

संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ ने बुधवार को राजनीतिक मेलमिलाप की बात कही है.

सत्तारूढ़ गठबंधन के उनके ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने की योजना के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर बोलते हुए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने 'मेलमिलाप की राजनीति' पर बल दिया. इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान दिया है.

पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले बुधवार को इस्लामाबाद स्थित राष्ट्रपति कार्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मुशर्रफ ने कहा, ''हमें अपनी अर्थव्यवस्था को ठीक करना है. यदि राजनीतिक स्थिरता होगी तभी हम दहशतगर्दी और अंतहापसंदी का मुकाबला कर पाएँगे."

उन्होंने राजनीतिक नेताओं की ओर इशारा करते हुए अपील की - "मैं गुज़ारिश करता हूँ कि हमें मेलमिलाप का रवैया अपनाना चाहिए ताकि देश में स्थिरता हो.''

उनका कहना था, ''हमें अपने मतभेद भुलाकर पाकिस्तान को मजबूत बनाने के लिए काम करना चाहिए.''

कश्मीर का मुद्दा

अपने भाषण में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया और भारत प्रशासित कश्मीर के हालात पर टिप्पणी की है.

उनका कहना था, ''इस मौक़े पर मैं कहना चाहता हूँ कि हर पाकिस्तानी कश्मीरी बहनों और भाइयों के साथ है.''

उनका कहना था, ''इसमें कोई शक नहीं कि हर पाकिस्तानी के दिल में कश्मीर धड़कता है और कश्मीर हर पाकिस्तानी की रगों में दौड़ता है.''

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ की इस टिप्पणी से पहले पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि वह भारत प्रशासित कश्मीर की हिंसा के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की योजना बना रही है.

इस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और कहा था कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.