मंगलवार, 12 अगस्त, 2008 को 10:09 GMT तक के समाचार
श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत प्रशासित राज्य जम्मू-कश्मीर के बिगड़े हालात पर विचार करने के लिए बनी सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल के नेता मंगलवार को एक बार फिर केंद्रीय गृहमंत्रालय में मिले, लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पाए.
माना जा रहा है कि इस बैठक में शामिल नेताओं की सलाह के अनुसार गृह मंत्रालय अमरनाथ संघर्ष समिति सहित जम्मू कश्मीर के अन्य दलों को बातचीत का न्यौता दे सकता है.
हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि सरकार की तरफ़ से जिन दलों को न्यौता दिया जाएगा उसमें हुर्रियत कॉंफ्रेंस का नाम होगा या नहीं.
फ़िलहाल सरकार कश्मीर के मसले पर किसी समाधान के क़रीब नज़र नही आ रही हैं लेकिन इस मुद्दे पर बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक और हो सकती है.
इससे पहले प्रधानमंत्री ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और उसी बैठक में जम्मू कश्मीर में सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल को भेजने का फ़ैसला किया गया था.
और चर्चा
बैठक में शामिल जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, “इस मसले का हल बातचीत से ही निकल सकता है, और मुझे इतना ही कहना है कि सभी पक्षों को बातचीत के लिए आगे आना चाहिए. सरकार सभी की संवेदनाओं और भावनाओं को समझेगी.”
बैठक में शामिल सीपीआई नेता डी राजा का कहना था कि इस मसले का हल किसी एक बैठक में नहीं निकल सकता, इसका हल एक प्रक्रिया के तहत ही निकलेगा.
उनका कहना था कि विचार-विमर्श जारी रखना पड़ेगा.
बैठक के बाद केंद्रीय गृहराज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने भी कोई ख़ास उम्मीद नही बंधाई, उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि गृहमंत्री ने सभी के विचार ले लिए हैं और जो उचित क़दम समझा जाएगा, वो सरकार उठाएगी.
मंगलवार की बैठक में शामिल सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल ने राज्य का दो दिन का दौरा किया था, जिसमें इन नेताओं ने अमरनाथ संघर्ष समिति और घाटी के नेताओं से गतिरोध तोड़ने के प्रयास में बातचीत की थी.