रविवार, 10 अगस्त, 2008 को 04:51 GMT तक के समाचार
अमरनाथ मंदिर ज़मीन मुद्दा सुलझाने के लिए रविवार को सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के शहर श्रीनगर में विभिन्न राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों से बातचीत करेगा.
इसके पहले प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू में अमरनाथ संघर्ष समिति के नेताओं से बातचीत की थी. हालांकि इस बातचीत से कोई नतीजा नहीं निकला.
केंद्रीय गृहमंत्री ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, " हमने दोनों ओर के सुझावों को ग़ौर से सुना है और उन्हें अपने पास दर्ज किया है. अब उनपर बातचीत औऱ सुझाव लेकर जल्द ही कोई फ़ैसला किया जाएगा."
गृह मंत्री का कहना था कि यह स्पष्ट हो गया है कि मामले का हल शक्ति से नहीं, समझदारी से निकलेगा.
अमरनाथ मंदिर ज़मीन विवाद सुलझाने के लिए दिल्ली से शनिवार को गृह मंत्री शिवराज पाटिल के नेतृत्व में 18 सदस्यों का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू पहुँचा था.
उल्लेखनीय है कि अमरनाथ संघर्ष समिति के साथ बातचीत में नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता फ़ारूख़ अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ़्ती और कांग्रेस के सैफ़ुद्दीन सोज़ को बातचीत से अलग रखा गया.
अमरनाथ संघर्ष समिति ने इन तीनों को अलग रखने की शर्त पर ही बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी.
बंद जारी
दूसरी ओर संघर्ष समिति ने कहा है कि वे अपने विरोध प्रदर्शन के क्रम से पीछे नहीं हटे हैं और यह मंदिर बोर्ड को ज़मीन दिए जाने तक जारी रहेगा.
दिल्ली के सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल के दौरे से ठीक पहले अमरनाथ संघर्ष समिति ने जम्मू में 14 अगस्त तक बंद को बढ़ाने का ऐलान कर दिया था.
समिति के नेताओं ने यह भी कहा कि जब तक राज्य सरकार की ओर से अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने के मामले में सकारात्मक प्रस्ताव नहीं आएगा संघर्ष समिति राज्यपाल के प्रतिनिधियों से बातचीत नहीं करेगी.
ग़ौरतलब है कि राज्यपाल एनएन वोहरा ने इस मसले का समाधान निकालने के लिए एक चार सदस्यीय समिति की घोषणा की थी.
अमरनाथ विवाद
ये पूरा विवाद तब शुरु हुआ था जब कांग्रेस के नेतृत्व और पीडीपी के सहयोग वाली ग़ुलाम नबी आज़ाद सरकार ने अस्थायी तौर पर सौ एकड़ ज़मीन अमरनाथ यात्रियों की व्यवस्था के लिए अमरनाथ मंदिर बोर्ड को देने का फ़ैसला किया.
इस पर कश्मीर घाटी में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन हुए, पीडीपी ने सरकार में फ़ैसले के समय शामिल होने के बावजूद अपना पल्ला झाड़ लिया और सरकार से समर्थन वापस ले लिया.
हालाँकि सरकार ने ये फ़ैसला वापस ले लिया लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार विधानसभा में समर्थन नहीं जुटा पाई और सत्ता से बाहर हो गई.
अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने का फ़ैसला वापस लेने पर और अमरनाथ यात्रा की ज़िम्मेदारी बोर्ड की जगह सरकार के हाथ में आ जाने के कारण जम्मू क्षेत्र में उग्र प्रदर्शन शुरु हो गए, जो अब भी जारी है.
अमरनाथ संघर्ष समिति की माँग है कि अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन दी जाए और अमरनाथ यात्रा की ज़िम्मेदारी फिर बोर्ड ही निभाए.