शनिवार, 09 अगस्त, 2008 को 15:14 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए विरोधी उनको जेल भेजने या मार डालने की साज़िश रच रहे हैं.
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मुक़दमों में उन्हें जेल भेजने या चरमपंथियों के हाथों उन्हें मरवाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है ताकि वो प्रधानमंत्री नहीं बन सकें.
प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक रैली में मायावती ने कहा, "अगर एक दलित की बेटी देश की सबसे ज़्यादा आबादी वाले प्रदेश की मुख्यमंत्री बन सकती है तो वह देश की प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकती."
उन्होंने आरोप लगाया कि देश की दोनों प्रमुख पार्टियाँ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी अब भी सवर्ण मानसिकता से घिरी है.
इस बीच रैली में आए कुछ लोग और पुलिस के जवान उमस भरी गर्मी में बेहोश होकर सभा में ही गिर पड़े. बाद में इनमें से दो लोगों की मौत हो गई.
'नेता दलित ही होगा'
करीब नब्बे मिनट के अपने भाषण में मायावती ने अपने ख़िलाफ़ चल रहे एक मुक़दमे पर विस्तार से बात की. उन्होंने आशंका जताई कि अगले आम चुनाव से पहले उन्हें इस मुक़दमे में जेल भी भेजा जा सकता है.
इससे आगे मायावती ने यह कहा कि अगर वो इस मुक़दमे से बरी हो जाती हैं तो भी उनके विरोधी चरमपंथियों या नक्सलियों से उनकी हत्या करवा सकते हैं.
बसपा प्रमुख ने रैली में यह घोषणा भी की कि अगर उनकी हत्या हो जाती है तो बसपा का नेतृत्व किसी दलित नेता के हाथों में ही रहेगा.
उन्होंने कहा, "मेरी मौत के बाद भी सिर्फ़ एक दलित नेता ही, वह भी मेरी चमार जाति का, इस पार्टी का नेतृत्व करेगा. मैं अपने उत्तराधिकारी को कई साल से तैयार कर रही हूँ जो मेरे परिवार का नहीं है. मैंने उसका नाम पार्टी के पैड पर लिखकर सीलबंद कर दिया है."
उन्होंने कहा कि यह नाम सही समय पर सामने लाया जाएगा ताकि उनकी पार्टी के अंदर ही उस नेता से जलने वाले लोग उसे नीचे उतारने में न लग जाएँ.
बसपा में शामिल हुए नटवर
कांग्रेस से नाराज़ चल रहे पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह इस रैली में बसपा में शामिल हो गए लेकिन उन्हें कोई ख़ास तवज़्जो मिलती दिखी नहीं.
राजस्थान के जाट समुदाय से आने वाले नटवर के बेटे जगत सिंह कुछ दिन पहले ही इस पार्टी में शामिल हुए थे.
इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के 'तेल के बदले अनाज कार्यक्रम' में हुई गड़बड़ी में नटवर के परिवार का नाम आने के बाद कांग्रेस ने उन्हें दरकिनार कर दिया था.
नटवर के अलावा इस रैली में कांग्रेस से ही आए अखिलेश दास और समाजवादी पार्टी छोड़कर आए शाहिद सिद्दीकी भी मंच पर मौजूद थे. लेकिन मायावती ने इनमें से किसी को भी बोलने का मौक़ा नहीं दिया.
मायावती ने अपने भाषण में कांग्रेस पर ख़ूब हमले किए. कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उनका दलित प्रेम नाटक है.
मायावती ने कुछ दिनों पहले केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था.
बाद में अमरीका से परमाणु करार के मसले पर सरकार से समर्थन वापस लेने वाले वामदलों ने सरकार गिराने की कोशिशों में मायावती के साथ हाथ मिलाया.
अब मायावती संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन में समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव की जगह ले चुकी हैं क्योंकि मुलायम की पार्टी अब सरकार का समर्थन कर रही है.
पहले से कम भीड़
ख़ास तौर से बनाए गए वातानुकूलित मंच से जब मायावती भाषण कर रही थीं तो उनकी पार्टी के ही कुछ कार्यकर्ता और रैली में तैनात कुछ पुलिस जवान उमस भरी गर्मी से बेहोश होकर गिर पड़े.
रैली के दौरान बीमार पड़े इन लोगों में दो की इलाज के दौरान मौत हो गई है.
मंच के ऊपर संसद की तस्वीर बनाई गई थी ताकि मायावती अपने कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिला सकें कि बसपा का अगला पड़ाव लोकसभा ही है.
सरकारी मशीनरी का पूरा इस्तेमाल करने के बावजूद रैली में अपेक्षाकृत कम भीड़ जुटने की चिंता मायावती के चेहरे पर साफ़ झलक रही थी.
उन्होंने आम चुनाव की तैयारी के मक़सद से कार्यकर्ताओं से चार महीने तक लोगों को गोलबंद करने का अभियान चलाने का आह्नान किया है.
बसपा की पहले की रैलियों के मुक़ाबले इस रैली में कम भीड़ जुटी थी. कार्यकर्ताओं में उत्साह की कमी भी साफ़ तौर पर दिख रही थी.
विश्लेषकों का तो यहाँ तक कहना है कि भाषण के दौरान मायावती में पुराना आत्मविश्वास और आक्रामकता नज़र नहीं आ रही थी.