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मंगलवार, 05 अगस्त, 2008 को 16:11 GMT तक के समाचार

सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, कोलकाता

विरासत के लापरवाह पहरेदार

कोलकाता स्थित प्रसिद्ध नेशनल लाइब्रेरी से कई महत्वपूर्ण काग़ज़ात और दुर्लभ पांडुलिपियों के ग़ायब होने की ख़बर है.

महालेखा नियंत्रक परीक्षक (सीएजी) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि हाल ही में की गई जाँच के दौरान प्रसिद्ध कवि रवींद्रनाथ टैगोर की प्रारंभिक रचनाओं और स्वतंत्रता आंदोलन के नेता सुभाषचंद्र बोस और सरोजनी नायडू की चिट्ठियों और लेखों को नेशनल लाइब्रेरी में नहीं ढूंढ़ा जा सका.

नेशनल लाइब्रेरी भारत में दुर्लभ दस्तवाज़ों के सबसे बड़े ख़ज़ानों में से एक है.

नेशनल लाइब्रेरी से बड़े पैमाने पर चोरी की शिकायत आने के बाद अनियमितताओं की जाँच के लिए सीएजी ने 11 सदस्यीय टीम का गठन किया था.

इसी टीम ने जाँच के दौरान नेशनल लाइब्रेरी से महत्वपूर्ण कागज़ात और दुर्लभ पांडुलिपियों को ग़ायब पाया है.

'लापरवाही'

सीएजी ने अब भारतीय संस्कृति मंत्रालय को लिखा है कि वह लाइब्रेरी के निदेशक के बारे में 'काम में लापरवाही' की शिकायत दर्ज करे.

सीएजी के अधिकारी ने बताया, " हमने कई लोगों को यह शिकायत करते हुए पाया कि उन्हें अपने शोध के लिए जिन दुर्लभ पांडुलिपियों और ग्रंथों की ज़रुरत होती है वह लाइब्रेरी में नहीं मिलती. लगभग 40 प्रतिशत दुर्लभ ग्रंथ और पांडुलिपि लाइब्रेरी में नहीं मिलती हैं."

जाँच को ध्यान में रखते हुए अधिकारी अपना नाम बताने को इच्छुक नहीं थे.

उधर नेशनल लाइब्रेरी के अधिकारी इस आरोप पर अपनी टिप्पणी नहीं देना चाह रहे थे. जब नेशनल लाइब्रेरी के प्रशासनिक कार्यालय से संपर्क किया गया तो वहाँ के एक अधिकारी का कहना था, "जाँच चल रही है और हम इस मामले को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते."

अभी तक कोलकाता पुलिस या केंद्रीय जाँच आयोग ने इस मामले की तफ़्तीश नहीं की है.

कोलकाता स्थित इंडियन म्यूज़ियम, एशियाटिक सोसाइटी लाइब्रेरी और विक्टोरिया मेमोरियल लाइब्रेरी भी जाँच के घेरे में हैं. जाँच अधिकारियों का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों में कोलकाता के इन ऐतिहासिक संग्रहालयों से बहुमूल्य पेंटिंग, पांडुलिपि और दुर्लभ कलाकृतियाँ भी ग़ायब हुई है.

ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने वाले इन संस्थान से चोरी की गई वस्तुओं की जाँच केंद्रीय जाँच आयोग (सीबीआई) कर रही है.

उल्लेखनीय है कि कवि रवींद्रनाथ टैगोर को वर्ष 1913 में मिले नोबल पुरस्कार पदक की चोरी वर्ष 2004 में पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन स्थित एक संग्रहालय से हो गई थी.