मंगलवार, 05 अगस्त, 2008 को 21:01 GMT तक के समाचार
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्रप्रदेश के उस विवादित क़ानून को सशर्त मंज़ूरी दे दी है जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में पिछड़े मुसलमानों को चार प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है.
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाले पीछ ने कहा है कि शिक्षण संस्थानों में प्रवेश इस बात पर निर्भर करेगा कि आंध्र प्रदेश के हाईकोर्ट में इस क़ानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फ़ैसला क्या आता है.
आंध्र प्रदेश सरकार वर्ष 2007 में सामाजिक और शैक्षिक रुप से पिछड़े मुसलमानों के लिए एक क़ानून बनाया था और अब इस क़ानून को हाईकोर्ट का सात जजों वाला संवैधानिक पीठ परख रहा है.
इसी साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को काउंसिलिंग जारी रखने की अनुमति दी थी लेकिन कॉलेजों में धर्म के आधार पर आरक्षण देकर प्रवेश देने पर रोक लगाई थी.
प्रवेश प्रक्रिया
याचिकाकर्ता का कहना था कि इस तरह के आरक्षण से संविधान का उल्लंघन होता है इसलिए राज्य सरकार का मुसलमानों को आरक्षण देने का फ़ैसला ग़ैरक़ानूनी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार वरिष्ठ वकील के परासरन और एडीशनल सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से काउंसिलिंग का कार्य पूरा हो चुका है और अब अगर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई तो प्रवेश की समूची प्रक्रिया पर असर पड़ेगा.
सुब्रमण्यम का कहना था कि आंघ्रप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण देने का फ़ैसला किया है.
सुप्रीम कोर्ट के पीठ का कहना था कि सिर्फ़ इस बात का फ़ैसला होना है कि क्या मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए उन्हें पिछड़ा वर्ग में शामिल माना जा सकता है.