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मंगलवार, 05 अगस्त, 2008 को 12:19 GMT तक के समाचार

अल क़ायदा से संबंध का आरोप

अल क़ायदा संगठन से जुड़े होने के शक पर एक पाकिस्तानी महिला को अफ़ग़ानिस्तान से अमरीका भेजा गया है. उन पर अमरीकी सैनिकों को जान से मारने की कोशिश करने के आरोप हैं और उन पर मुक़दमा चलाया जाएगा.

पहले अमरीका की नागरिक रही 36 वर्षीय आफ़िया सिद्दीक़ी को 17 जुलाई को अफ़ग़ानिस्तान के ग़ाज़ी प्रांत से गिरफ़्तार किया गया. ग़ौरतलब है कि वे जाने-माने अमरीकी संस्थान 'मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेकनॉलॉजी' की छात्रा रह चुकी हैं.

वर्ष 2004 में अमरीकी गुप्तचर एजेंसी एफ़बीआई ने उनका नाम लिया था और मंशा ज़ाहिर की थी कि अल क़ायदा के साथ संबंध होने के शक के कारण वे आफ़िया से पूछताछ करना चाहते हैं.

बताया गया है कि वे पिछले पाँच साल से लापता थीं. ख़बरों में बताया गया है कि वर्ष 2003 में अपने तीन बच्चों के साथ कराची में अपने माता-पिता से मिलने गईं आफ़िया ग़ायब हो गई थीं.

आफ़िया का परिवार और मानवाधिकार गुट ये मानते हैं कि उन्हें अमरीकी अधिकारियों ने गुप्त तौर पर किसी अज्ञात स्थान पर क़ैद कर रखा था.

'आतंकवादी नही'

जब अमरीकी अधिकारी आफ़िया को गिरफ़्तार करने गए तब उन्होंने उन पर दो गोलियाँ चलाईं. उनकी चलाई गोली तो किसी को नहीं लगी लेकिन जवाब में अमरीकी अधिकारी की गोली आफ़िया की छाती में लगी.

अधिकारियों के हवाले से ये कहा गया है कि जब आफ़िया को गिरफ़्तार किया गया तब उनके पास से ऐसे दस्तावेज़ मिले जिनमें विस्फोटक बनाने की जानकारी और प्रमुख अमरीकी इमारतों की जानकारी इत्यादि थी.

आफ़िया सिद्दीक़ी पर अमरीकी अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमला करने और जान से मार देने की कोशिश करने के आरोप हैं और यदि उन्हें दोषी पाया जाता है तो उन्हें 20 साल तक की जेल हो सकती है.

लेकिन आफ़िया की वकील ने उनके ख़िलाफ़ लगे आरोपों को 'एक कहानी' बताया है.

वकील एलेन विट्फ़ील्ड का कहना था, "मुझे लगता है कि आफ़िया अमरीकी अधिकारियों के लिए बहुत शर्मिंदगी का कारण बन गई है. लेकिन वो कोई आतंकवादी नहीं है. जब सच सार्वजनिक होगा, जनता को समझ में आ जाएगा कि उसने कुछ भी ग़लत नहीं किया."