बीनू जोशी
बीबीसी संवाददाता, जम्मू से
अमरनाथ मंदिर बोर्ड से ज़मीन वापस लेने के मुद्दे पर प्रदर्शनों को देखते हुए भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर राज्य के ऊधमपुर और राजौरी ज़िलों में भी कर्फ़्यू लगा दिया गया है.
साथ ही स्थिति पर नियंत्रण के लिए इन दोनों स्थानों पर सेना को बुला लिया गया है.
साथ ही आंदोलन के विस्तार को देखते हुए जम्मू क्षेत्र में एसएमएस सेवा को रोक दिया गया है.
पुलिस ने रविवार को पत्रकारों पर भी लाठीचार्ज किया और आँसू गैस छोड़ी जिसमें तीन पत्रकार घायल हो गए हैं, साथ ही दो स्थानीय चैनलों का प्रसारण रुकवा दिया गया है.
ग़ौरतलब है कि अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति ने रविवार को पठानकोट-श्रीनगर राजमार्ग को बंद करने की धमकी दी थी.
इसके पहले जम्मू और सांबा ज़िलों में उग्र प्रदर्शनों के बाद कर्फ़्यू लगा दिया गया था और सेना बुला ली गई थी.
अमरनाथ मंदिर बोर्ड को दी गई ज़मीन वापस लेने के विरोध में चल रहा आंदोलन शुक्रवार को हिंसक हो गया था, जिसमें दो लोग मारे गए थे.
आंदोलन की पृष्ठभूमि
अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन दिए जाने के फ़ैसले को रद्द करने और अमरनाथ यात्रा की ज़िम्मेदारी बोर्ड की जगह राज्य सरकार के हाथ में आने के बाद जम्मू में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं.
तीस राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने मिलकर अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति बनाई है जो इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही है.
उनकी माँग है कि अमरनाथ बोर्ड को विवादित ज़मीन वापस दी जाए और अमरनाथ यात्रा का प्रबंधन फिर अमरनाथ बोर्ड ही संभाले.
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर सरकार ने अमरनाथ मंदिर बोर्ड को चालीस हेक्टेयर ज़मीन देने की घोषणा की थी जिस पर अमरनाथ यात्रियों के लिए अस्थायी सुविधाओं का निर्माण किया जाना था.
लेकिन बाद में जम्मू-कश्मीर की सरकार ने यह फ़ैसला वापस ले लिया.
अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने के मामले पर कश्मीर घाटी के कई संगठनों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किए थे जिसके बाद सरकार ने फ़ैसला वापस ले लिया था.
इस विवाद के कारण ही कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार से पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने अपना समर्थन वापस ले लिया था.