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रविवार, 03 अगस्त, 2008 को 14:38 GMT तक के समाचार

'आतंकवाद से निपटने का आह्वान'

श्रीलंका में हुए 15वें दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) सम्मेलन के आख़िरी दिन सभी देशों ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ मिलकर और कड़ाई से क़दम उठाने का आह्वान किया है.

कोलंबो में सभी नेताओं ने एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं जिसके तहत आतंकवादियों और अपराधियों की अदला-बदली हो सकेगी.

सार्क सम्मेलन के घोषणापत्र में ऊर्जा, खाद्य संकट और व्यापार के मसलों पर मिलकर काम करने की बात उठाई गई है.

दो दिन के इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा सात अन्य देशों के नेताओं ने हिस्सा लिया.

इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी, अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई और नेपाल के प्रधानमंत्री जीपी कोइराला शामिल है.

इस सम्मेलन पर आतंकवाद का मुद्दा छाया रहा. अभी हाल ही में काबुल में भारतीय दूतावास पर आत्मघाती हमला हुआ था.

सम्मेलन में सभी देशों ने स्वीकार किया कि क्षेत्र में शांति और स्थायित्व के लिए आतंकवाद बड़ा ख़तरा है.

घोषणापत्र

आतंकवाद से निपटने और सार्क देशों में अपराध से निपटने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए जिसे सार्क कन्वेंशन ऑन म्यूचूयल लीगल एसिसटेंस इन क्रिमिनल मैटर्स का नाम दिया गया है.

इसमें पाकिस्तान ने प्रत्यर्पण के मुद्दे पर शुरु में आपत्ति जताई थी.

अपराधियों और आतंकवादियों को पकड़ने की दिशा में सदस्य देशों के बीच इस संधि के तहत बेहतर तालमेल हो पाएगा.

सार्क घोषणापत्र में आतंकवाद से लड़ने पर विशेष ज़ोर दिया गया. भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सार्क शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि दक्षिण एशिया के लिए 'आतंकवाद' सबसे बड़ा ख़तरा है.

कोलंबो में भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात भी की थी.

यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने काबुल में जुलाई में भारतीय दूतावास पर हुए हमले की जाँच कराने का वादा किया है.

वहीं अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति ने भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की. दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि इस्लामिक चमरपंथ के लिए फिर से मिलकर लड़ेगें.

सार्क की अगली बैठक मालदीव में होगी. दरअसल 15वां सार्क सम्मेलन मालदीव को ही करना था लेकिन आख़िरी मौके पर उसने मना कर दिया.