शुक्रवार, 01 अगस्त, 2008 को 16:47 GMT तक के समाचार
अविनाश दत्त गर्ग
बीबीसी संवाददाता, कोलंबो से
कोलंबो में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी की मुलाक़ात से पहले भारत का अपने पड़ोसी देश के प्रति रुख सख्त होता जा रहा है.
भारत के विदेश मंत्री शिव शंकर मेनन ने यहाँ शुक्रवार शाम को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "भारत-पाकिस्तान के रिश्ते ऐसे हो गए हैं जैसे पिछले चार साल से नहीं थे. ऐसा इसलिए है क्योंकि हाल के दिनों में कई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ हुई हैं."
मेनन ने कहा, "हाल की घटनाओं का प्रभाव भारत और पकिस्तान के बीच जारी बातचीत के भविष्य पर पड़ा है इसीलिए हम पकिस्तान से बात कर रहे हैं."
गुरुवार को पकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बताया था कि भारत और पकिस्तान के प्रधानमंत्री द्विपक्षीय बातचीत के बाद एक विस्तृत बयान जारी करेंगे. इस बारे में जब मेनन से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि "विस्तार से वो भी बात करेगें और हम भी, आख़िर ये हमारी खुली और मित्रतापूर्ण बातचीत है".
कोलंबो में भारतीय अखबार द हिंदू के वरिष्ठ संवाददाता बी मुरलीधर रेड्डी पाकिस्तान में दस साल काम कर चुके हैं और वहां के हालत को बखूबी समझते हैं.
आख़िर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक से पहले विदेश सचिव ने ऐसा बयान क्यों दिया, इस पर रेड्डी बोले, "परेशानी भारत सरकार के सामने ये है कि पकिस्तान में चुनी हुई सरकार के बावजूद वहाँ फ़ौज और आईएसआई का ही दबदबा है. अब भारत सरकार ये नहीं जानती कि ये चुनी हुई सरकार का कितना दबाव फ़ौज और आईएसआई पर डाल पाएगी. वो चाहते हैं कि वहां की सरकार कुछ कर के दिखाए."
रेड्डी ये भी मानते हैं कि आईएईए से भारत को औपचारिक हरी झंडी मिलने के बाद भारत का मनोबल इस समय बहुत बढ़ा हुआ है और ठीक इसी कारण से पकिस्तान की चुनी हुई सरकार के लिए परेशानी बढ़ गई है.
दूसरी तरफ़, भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आईएईए के प्रति भी आभार व्यक्त किया है. इसके अलावा कोलंबो में मनमोहन सिंह ने आज श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से मुलाकात की और व्यापार सहित दूसरे द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की.