बुधवार, 30 जुलाई, 2008 को 15:04 GMT तक के समाचार
लोकसभा में विश्वासमत हासिल करने के लिए सांसदों की कथित ख़रीद-फ़रोख़्त के मामले की जाँच करने वाली समिति की पहली बैठक बुधवार को हुई.
सबसे पहले जाँच समिति जाँच संबंधी दिशा-निर्देशों को तय करेगी. इस बीच विपक्षी पार्टी ने माँग की है जाँच समिति में और अधिक प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए.
उल्लेखनीय है कि लोकसभा में विश्वासमत हासिल करने के लिए सांसदों की कथित ख़रीद फ़रोख़्त के मामले में सात सदस्यीय जाँच समिति का गठन किया गया था.
वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य वी किशोर चंद्र देव के नेतृत्व वाली इस समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने किया था.
जाँच समिति बीजेपी के तीन सांसद अशोक अर्गल, राजस्थान के महावीर भागौरा और फग्गन सिंह कुलस्ते से जाँच संबंधी सामग्री इकट्ठा करेगी.
आरोपों से इनकार
बीजेपी के तीनों सांसदों ने 22 जुलाई को लोकसभा में विश्वासमत के दौरान एक करोड़ रुपए के नोटों की गड्डियां लहरा कर सनसनी फैला दी थी.
तीनों सांसदों ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने विश्वास मत में हिस्सा नहीं लेने के बदले रुपए देने की पेशकश की थी. जबकि इन दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया था.
बीजेपी का कहना था कि तीनों सांसदों को विश्वासमत में हिस्सा नहीं लेने के लिए नौ करोड़ रुपए की राशि देने की पेशकश की गई थी और एडवांस के तौर पर एक-एक करोड़ रुपये दिए गए थे.
मनमोहन सरकार ने 19 मतों से विश्वासमत जीत लिया था.
समिति के दूसरे सदस्यों में बीजेपी के विजय कुमार मल्होत्रा, सीपीएम के मोहम्मद सलीम, सपा के राम गोपाल यादव, आरजेडी के देवेंद्र प्रसाद यादव, बसपा के राजेश वर्मा और डीएमके के सी कुप्पुस्वामी शामिल हैं.
संभावना है कि जाँच समिति उन संवाददाताओं को भी सम्मन भेजें जिन्होंने कथित ख़रीद फ़रोख़्त मामले में स्टिंग ऑपरेशन किया था. जिस चैनल ने यह स्टिंग ऑपरेशन किया था उसने लोकसभा अध्यक्ष को स्टिंग ऑपरेशन की रिकार्डिंग पहले ही सौंप दी थी.