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शनिवार, 26 जुलाई, 2008 को 08:54 GMT तक के समाचार

'सामरिक कार्यक्रम पर समझौता नहीं'

भारत में परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर ने कहा है कि देश के सामरिक परमाणु कार्यक्रम के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.

शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के 54वें दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा, " परमाणु ऊर्जा से लाखों गुना ऊष्मीय ताप से ऊर्जा के क्षेत्र में भारी बदलाव आएगा. ख़ास बात ये है कि इससे ख़तरनाक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नगण्य होता है."

काकोदकर ने कहा कि ये कहने की जरूरत नहीं है कि भारत के सामरिक कार्यक्रम से साथ कोई समझौता किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि भारत परमाणु प्रौद्योगिकी में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है.

उन्होंने कहा कि देश को शुरुआती दौर में अतिरिक्त यूरेनियम की ज़रूरत है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार काकोदकर ने कहा कि भारत अपनी राह पर चलने की क्षमता के मामले में हमेशा से आत्मनिर्भर रहा है, लेकिन मौजूदा प्रतिबंधों के कारण इसमें कुछ बाधाएँ आ रही हैं.

वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक ने कहा कि भारत तीन चरणों वाला घरेलू विकास कार्यक्रम अपनाएगा. इसकी मदद से देश में मौजूदा थोरियम संसाधनों को उच्च प्राथमिकता के साथ व्यापक ऊर्जा संभावना में तब्दील किया जा सकता है.

काकोदकर ने कहा कि दिलचस्प है कि बिजली उत्पादन करने वाले परमाणु संयंत्रों से ही परमाणु ईंधन का उत्पादन भी होता है और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर खपत की तुलना में कहीं ज़्यादा ईंधन का उत्पादन करते हैं.