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सोमनाथ चटर्जी पार्टी से निष्कासित

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को पार्टी की सदस्यता से निष्कासित कर दिया है.

सोमनाथ चटर्जी ने विश्वास मत के मामले पर पार्टी का निर्देश मानने से इनकार कर दिया था, उनका कहना था कि स्पीकर किसी पार्टी का व्यक्ति नहीं होता इसलिए उन पर ये निर्देश लागू नहीं होते.

दस बार सांसद रह चुके 79 वर्षीय सोमनाथ चटर्जी को हटाने का फ़ैसला पार्टी की पोलित ब्यूरो की बैठक में किया गया, वे 1968 से पार्टी के सदस्य थे.

पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उन्हें पार्टी के संविधान में उल्लिखित नियमों के तहत 'पार्टी हितों को नुक़सान पहुँचाने के कारण' निकाला गया.

सोमनाथ चटर्जी के निष्कासन के बाद पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य बिमान बोस ने कहा, "सोमनाथ चटर्जी ने पार्टी का अनुशासन तोड़ा था, कोई भी पार्टी से ऊपर नहीं है. हम सभी पार्टी के नियमों का पालन करते हैं, जो पार्टी के नियम नहीं मानते उनसे हम सारे संबंध तोड़ लेते हैं."

यह पहला मौक़ा है जबकि किसी पार्टी ने अपने स्पीकर को ही पार्टी की सदस्यता से निकाल दिया हो.

सीपीएम के नेता प्रकाश कारत ने इच्छा ज़ाहिर की थी कि सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद सोमनाथ चटर्जी को स्पीकर का पद छोड़ देना चाहिए लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.

स्पीकर का पद

क़ानूनन सोमनाथ चटर्जी पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद भी लोकसभा के अध्यक्ष बने रह सकते हैं.

लोकसभा के स्पीकर को सिर्फ़ महाभियोग के ज़रिए दो-तिहाई सांसदों के बहुमत से हटाया जा सकता है.

सोमनाथ चटर्जी की ओर से अभी तक इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

मनमोहन सिंह के विश्वास मत हासिल कर लेने बाद सीपीएम की ओर से सोमनाथ चटर्जी के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की संभावना पहले से ही व्यक्त की जा रही थी.

इस बीच कांग्रेस की प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा है कि स्पीकर के पद पर सोमनाथ चटर्जी को बने रहना चाहिए क्योंकि "वे सिर्फ़ सीपीएम के स्पीकर नहीं थे बल्कि पूरे देश की लोकसभा के स्पीकर हैं, उन्हें सीपीएम ने नहीं, हम सबने चुना है".