मंगलवार, 22 जुलाई, 2008 को 06:33 GMT तक के समाचार
लोकसभा में विश्वास प्रस्ताव पर बहस में बीजेपी नेता विजय कुमार मल्होत्रा के भाषण के दौरान भाषण जब उन्होंने जेल से आए सांसदों की बात हुई तो ख़ासा शोर हुआ और स्पीकर को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
वित्त मंत्री पी चिंदबरम के भाषण के बाद बीजेपी नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने भाषण शुरु किया और जैसे ही उन्होंने जेल से सदन में आकर वोट डालने वाले संसदों का मसला उठाया तो शोर-शराबा होने लगा.
मल्होत्रा का कहना था कि यूपीए सरकार ने मतदान में जीतने के लिए 'दाग़ी सांसदों' का सहारा लिया.
इससे यूपीए नेता और जेल से आए सांसद ख़ासे नाराज़ हो गए. पप्पू यादव और कुछ अन्य सांसद अपनी सीट पर खड़े होकर नाराज़गी जताने लगे और शोरगुल के बीच सदन स्थगित करना पड़ा.
सौदेबाज़ी के आरोप
भाषण की शुरुआत करते हुए मल्होत्रा ने कहा कि यूपीए के मंत्रियों ने भाषण दिया और आकड़े गिनाए कि पिछले चार सालों में जहां भी चुनाव हुए कांग्रेस हारी है.
उनका कहना था, "जिन आकड़ों के साथ आप जनसमर्थन का दावा कर रहे हैं उन आकड़ों को जनता ने नकार दिया है."
उन्होंने कहा, "यूपीए सरकार ने सबसे ग़लत काम किया है कि अल्पमत में होने के बावजूद सरकार ने साम दाम दंड भेद का प्रयोग किया. जिस तरह से ख़रीद-फ़रोख्त की गई. मंत्रालय बांटे गए वो सही नहीं है."
मल्होत्रा का कहना था कि प्रधानमंत्री कार्यालय और सोनिया गांधी के घर से सौदेबाज़ी हो रही है. सांसदों ने इसका विरोध नियम 352 के तहत किया जिसे स्पीकर ने माना और मल्होत्रा से कहा कि वो बिना सबूत आरोप न लगाएं.
मल्होत्रा ने सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया और ये भी कहा कि यूपीए सरकार 'दागी सांसदों' के सहारे जीतने की कोशिश कर रही है.
इस पर स्पीकर ने कहा कि वो न तो सांसदों के ख़िलाफ़ बिना सबूत के कोई आरोप न लगाएं और न ही जेल से आए सांसदों पर टिप्पणी करें क्योंकि उन्हें मत देने का अधिकार है.
इस पर शोर शराबे के बाद सदन को पंद्रह मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया.